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भाई मेरी आबरू लूटता है, मां और भाई कहते हैं परिवार का मामला है ‘चुप रहो’

Thu, 25 Jan 2018 05:14 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शादी का झांसा देकर दुराचार - फोटो : Demo Photo
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भाई मेरी आबरू लूटता रहा, उसने नहाते हुए मेरी फोटो भी क्लिक की। मां और भाई को बताया तो वो कहते हैं परिवार का मामला है ‘चुप रहो'। जिस परिवार पर मेरी सुरक्षा की सामाजिक जिम्मेदारी थी, उसने चाचा के बेटे द्वारा रेप किए जाने के बाद चुप्पी साध ली। इसके कारण अगले दो साल साल तक मेरे साथ दरिंदगी होती रही।
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हरियाणा की एक बेटी ने याचिका दाखिल करते हुए पूरे सामाजिक ताने-बाने पर सवाल उठाते हुए अपनी मां और भाई को अपने साथ हुए रेप के मामले में बराबर का दोषी बताते हुए उन्हें सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार सहित पीड़िता की मां और भाई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

एडवोकेट फारुख अब्दुल्ला के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए फरीदाबाद निवासी रेप पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि 2015 में एक दिन चाचा का बेटा उसके पास आया और उसके नहाने के दौरान की फोटो दिखाई। पीड़िता ने फोटो डिलीट करने को कहा। उसने फोटो डिलीट करने का वायदा किया और कमरे में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद वह लगातार ब्लैकमेल कर दुष्कर्म करता रहा।
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गर्भपात भी कराया, अब बच्चे को जन्म दिया

rape
पीड़िता ने बताया कि इसी बीच वह प्रेग्नेंट हो गई और गर्भ गिराने की उसे दवा खिला दी गई। पीड़िता ने यह बात अपनी मां और भाई को बताई। दोनों ने दोषी के खिलाफ कोई एक्शन लेने की बजाए चुप्पी साध ली और परिवार का मामला होने की दुहाई देते हुए पीड़िता को भी चुप रहने को कहा। इसके बाद पीड़िता की शादी हो गई बावजूद चचेरा भाई फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे बलात्कार करता रहा।

बीते वर्ष पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद भी चचेरा भाई लगातार पीड़िता पर मिलने का दबाव बनाता रहा। पीड़िता ने यह बात अपने पति को बताई, जिसके बाद दोनों ने फरीदाबाद महिला थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करवाई। पुलिस ने इस मामले में चालान दाखिल किया, परंतु जिला अदालत ने पीड़िता के मां और भाई को आरोपियों की सूची से बाहर कर दिया। अब पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए दोनों को अतिरिक्त आरोपी के रूप में ट्रायल में शामिल करने के निर्देश दिए जाने की अपील की है।

पीड़िता ने कहा कि समाज में परिजन और भाई बेटी की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। यह उनकी सामाजिक जिम्मेदारी के साथ नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी भी बनती है। बावजूद इसके मां और भाई के मौन के कारण एक बेटी को दरिंदा अपनी हवस का शिकार बनाता रहा और दोनों चुप रहे। उनकी चुप्पी के कारण बार-बार उसे उस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा। ऐसे में दोनों को सजा देकर न्यायालय को समाज के समाने एक उदाहरण पेश करना चाहिए कि बेटी की सुरक्षा न करने वालों का क्या अंजाम होता है।
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