चंडीगढ़। पीजीआई की ओर से शनिवार को जेनरिक दवाओं को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित करवाई गई। इस दौरान पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने जेनरिक दवाओं की महत्ता बताते हुए कहा कि अस्पताल प्रशासन डॉक्टरों को जेनरिक दवाओं को लिखने और बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पीजीआई की ओर से ही किए गए अध्ययनों में स्पष्ट हुआ है कि जेनरिक दवाएं कैंसर जैसी घातक बीमारियों में भी बहुत अधिक प्रभावी हैं। किडनी ट्रांस्पलांटेशन में भी जेनरिक दवाओं को समान रूप से प्रभावी पाया गया है। वहीं इन दवाओं की कीमत ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले पांच गुना कम है। पीजीआई में पिछले कई दिनों से जेनरिक दवाओं के प्रभावी होने को लेकर विवाद चल रहा था और भ्रम पैदा हो रहे थे।
डॉ. विवेक लाल ने बताया कि रीलैप्स्ड रिफ्रैक्टरी मल्टीपल मायलोमा में जेनेरिक पोमालिडोमाइड ही भारत में उपलब्ध है, इसका ब्रांडेड काउंटरपार्ट बहुत महंगा है। इसलिए यहां सिर्फ जेनरिक का ही इस्तेमाल हो रहा है। स्टडी के अनुसार अमेरिका में उपलब्ध इनोवेटिव दवा के मुकाबले यह अधिक प्रभावी है और इसकी बेहतर प्रतिक्रिया मिली है। पीजीआई अंग प्रत्यारोपण में एक अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र का अस्पताल है, इसी हफ्ते गुर्दे के प्रत्यारोपण के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया है। प्रत्यारोपण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रोगी को प्रत्यारोपण के लिए तैयार करना होता है, अन्यथा रोगी का शरीर किडनी को अस्वीकार कर देता है। इस तैयारी में किसी मरीज को प्रत्यारोपण के लिए तैयार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दवा एंटीथाइमोसाइट ग्लोब्युलिन, एटीजी है। पीजीआई के अध्ययन ने यह साबित किया है कि जेनेरिक दवा न केवल मरीज को प्रत्यारोपण के लिए तैयार करने और बाद में अस्वीकृति को रोकने में प्रभावी है बल्कि इसकी आधी खुराक भी दुनिया भर में उपलब्ध इनोवेटिव दवाओं जितनी ही प्रभावी है।
तीन माह में सात अमृत फार्मेसी में बिकी 44 करोड़ की दवा
डॉ. विवेक ने बताया कि पीजीआई के अमृत फार्मेसी और जन औषधी केंद्र में देश में सबसे अधिक दवाएं बिकने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। पिछले तीन माह में पीजीआई के सात अमृत फार्मेसी में 44 करोड़ की दवाएं बिकी हैं। वहीं दो जन औषधी केंद्रों में लगभग 72 लाख की दवाओं की बिक्री हुई है। पीजीआई की ओर से वर्ष 2022-23 में खरीदी गई दवाओं में 88 प्रतिशत जेनरिक हैं और 12 प्रतिशत ब्रांडेड।