-गिरफ्तार आरोपियों से 250 से ज्यादा फर्जी दस्तावेज बरामद, बर्थ सर्टिफिकेट से लेकर फर्जी आधार करते थे तैयार
-बार कोड के साथ ऐसा आधार कार्ड करते हैं तैयार कि असली और नकली का फर्क बताना मुश्किल-नाबालिग की 2 काउंसिल के बावजूद अपनी प्रेमिका संग रहने की जिद पर अड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। समलैंगिक जोड़े को लेकर चल रहे विवाद के बीच आधार कार्ड फर्जीवाड़े की स्टेटस रिपोर्ट ने हाईकोर्ट को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट में सामने आया कि गिरफ्तार किए आरोपी से 250 से ज्यादा फर्जी दस्तावेज मिले हैं, इन्हें सामान्य रूप से देखकर कोई नहीं बता सकता कि यह नकली हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि शुरुआती दौर में आरोपी के पास से 250 से अधिक दस्तावेज मिलना यह बताता है कि कितने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। पिछली सुनवाई पर हरियाणा पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया था कि काजल ने नाबालिग का आधार कार्ड बनवाने के लिए फर्जीवाड़ा किया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने दस्तावेजों के फर्जीवाड़े को लेकर भी जांच का आदेश दिया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हरियाणा पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया कि काजल ने नाबालिग का आधार कार्ड बनाने में फर्जीवाड़ा किया था। जब पुलिस जांच के लिए गहराई में उतरी तो एक गैंग सामने आया है और उसके सदस्यों की गिरफ्तारी के दौरान 250 से अधिक फर्जी दस्तावेज मिले हैं। इन्हें इतनी सफाई से तैयार किया गया है कि आम आदमी असली और नकली में फर्क नहीं कर सकता। कार्ड पर लगे बार कोड को स्कैन करने पर भी वह वेबसाइट पर लेकर जाता है। हाईकोर्ट ने जांच को आगे बढ़ाने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार पुलिस ने काजल की नाबालिग साथी को भी अदालत में पेश किया। कोर्ट को बताया गया कि आदेश के अनुसार इसकी दो बार काउंसलिंग की जा चुकी है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने नाबालिग से पूछा कि क्या वह अपने अभिभावकों के साथ जाना चाहती है तो उसने इससे इन्कार कर दिया। उसने कहा कि उसे अपनी साथी काजल के साथ ही रहना है। इसके बाद हाईकोर्ट ने इससे इन्कार करते हुए नाबालिग को आशियाना भेज दिया।
पंचकूला निवासी काजल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि वह अपनी साथी के साथ रहना चाहती है और दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं। उसकी साथी के परिजनों ने याची के खिलाफ अपहरण व अन्य धाराओं में मामला दर्ज करवाया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद याची व उसकी साथी पुलिस थाने गए थे।