चंडीगढ़। कोरोना के चलते इस बार भगवान गणेश का नदी में विसर्जन करने के बजाय उन्हें एक बर्तन में जल भरकर उसमें ही विसर्जित किया जाएगा। इसके बाद इसमें बने मिट्टी और पानी के घोल को पेड़-पौधों में डाला जाएगा। इस तरह गणपति बप्पा सारा साल फूलों व पत्तों में विराजमान रहेंगे।
महराष्ट्र भवन में सोमवार को गणपति विसर्जन होगा। इस दौरान एक बड़े ड्रम में पानी भरकर उसमें बप्पा को विसर्जित किया जाएगा। इसके बाद मिट्टी के घोल और जल को महाराष्ट्र भवन में लगे पौधों और फूलों में डाला जाएगा। इस बार कोरोना वायरस के चलते धार्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों पर रोक लगे होने के कारण गणेशोत्सव पर भी बाजारों, मंदिरों आदि में रौनक नहीं है। हर साल 10 दिन तक गणेश जी सेक्टर-19 के महाराष्ट्र भवन में विराजमान होते थे लेकिन इस बार उन्हें तीन दिन बाद ही विदा कर दिया जाएगा।
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष एमबी साने ने बताया कि 22 अगस्त को विराजमान हुए गणपति बप्पा की 24 अगस्त को विदाई के दौरान कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होगा। रविवार को सुबह दस से पांच बजे तक भक्तों ने दर्शन किया। अब सोमवार को सुबह नौ बजे पूजा होगी और शाम चार बजे विसर्जन होगा। इस दौरान महाराष्ट्र भवन में बाहरी लोग नहीं आ सकेंगे।