चंडीगढ़ में हालिया मामलों की जांच में गैंगस्टरों का एक खतरनाक ट्रेंड सामने आया है। अब गिरोह युवाओं को पैसों और ड्रग्स का लालच देकर शूटर बना रहे हैं लेकिन वारदात के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ देते हैं। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को तय रकम तक नहीं दी जाती और जेल जाने के बाद उनसे संपर्क तक तोड़ लिया जाता है।
हाल ही में सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय पर हुए ग्रेनेड हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ। सूत्रों के मुताबिक हमले को अंजाम देने वाले आरोपियों को दो लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक भी पैसा नहीं मिला। वारदात के बाद आरोपी सीटीयू बस से भागे, तो उनके पास केवल 20-20 रुपये के दो नोट ही थे। चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में हुई कई बड़ी वारदात में यह पैटर्न सामने आ चुका है।
जनवरी में सेक्टर-32 स्थित सेवक फार्मेसी पर हुई फायरिंग में खुलासा हुआ था कि गैंगस्टर साबा गोबिंदगढ़ ने ड्रग्स के आदी युवकों को हायर किया था। वहीं, सेक्टर-21 में अंकित सदाना के घर फायरिंग मामले में पकड़े गए आरोपियों ने बताया था कि उन्होंने मात्र 10 हजार रुपये के लिए वारदात को अंजाम दिया।
आर्थिक रूप से कमजोर युवक निशाने पर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गैंगस्टर ऐसे युवकों को निशाना बनाते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हों या जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत हो। अधिकतर मामलों में सामने आया है कि युवक अपनी नशे की लत पूरी करने के लिए मामूली रकम में अपराध के दलदल में फंस जाते हैं। जेल जाने के बाद उन्हें फिर उसी तरह की संगत मिलती है, जिससे अपराध की दुनिया से बाहर निकलना और मुश्किल हो जाता है।
ऐसे फंसाते हैं जाल में
गैंगस्टर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे स्नैपचैट, इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिये युवाओं को टारगेट करते हैं। प्रोफाइल पर हथियारों की तस्वीरें लगाकर वे रुतबे का दिखावा करते हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रिक्वेस्ट भेजते हैं। जो युवक बातचीत शुरू करते हैं, उन्हें धीरे-धीरे अपने प्रभाव में लिया जाता है। पहले दोस्ती, फिर पैसा, रुतबा और विदेश भेजने के सपने दिखाकर उनका माइंड वॉश किया जाता है। इसके बाद उनसे वारदात करवाई जाती है। जांच एजेंसियों के अनुसार कई मामलों में शूटरों को सिर्फ वारदात तक के खर्च के लिए ही पैसे दिए जाते हैं। सेक्टर-45 के चर्चित सोनू शाह मर्डर केस में भी यही पैटर्न सामने आया था। जांच में खुलासा हुआ था कि शूटर्स को सीमित खर्च दिया गया था।
इस मामले में शूटर शुबम उर्फ बिग्नी, मनजीत उर्फ मोटा और रंजन को उम्रकैद की सजा हुई, जबकि गैंगस्टर लॉरेंस, राजू बसौदी समेत अन्य आरोपी बरी हो गए। सूत्रों के मुताबिक कुछ मामलों में मास्टरमाइंड खुद ही शूटरों को फंसवा देते हैं, ताकि वे कानून की पकड़ से दूर रह सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को ऐसे झांसे से बचने की जरूरत है, क्योंकि एक बार इस जाल में फंसने के बाद उनका इस्तेमाल कर उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है।
ग्रेनेड हमला करने वाले आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की जाएगी।
-पुष्पेंद्र कुमार, आईजी