अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर चंडीगढ़ के दामन पर अपराध के दाग गहराते जा रहे हैं। आए दिन हो रहीं वारदातें पुलिस के लिए भी चुनौती बन रही हैं। सबसे बड़ी चिंता गैंगस्टरों में चल रही गैंगवार है। गुरलाल बराड़ की हत्या भी गैंगवार का ही नतीजा है।
शहर में ऐसे कई क्लब हैं, जहां चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा समेत अन्य राज्यों से गैंगस्टर मौज मस्ती करने आते हैं। ये गैंगस्टर क्लब में अपने गोरखधंधे भी चलाते हैं। चंडीगढ़ के ज्यादातर क्लबों के बाहर ये गैंगस्टर आए दिन मारपीट और हंगामा करते हैं। पुलिस भी कई बार इनके खिलाफ मामला दर्ज कर लेती है लेकिन आगे कुछ नहीं होता। ऐसे में कुछ दिनों बाद फिर ये फिर पुराने रंग में आ जाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि क्लबों के बाहर गैंगवार के पीछे बाउंसरों का भी अहम रोल रहता है। बात चाहे बाउंसर मीत हत्याकांड की हो या फिर बाउंसर सुरजीत की हत्या की। इन सभी हत्याओं के पीछे बाउंसर और गैंगस्टर्स का आपसी रंजिश या फिर किसी का समर्थन करना होता है। क्लबों में तैनात कुछ बाउंसर भी इन गैंगस्टर के संपर्क में रहते हैं, यही वजह होती है कि उनका आसानी से चंडीगढ़ क्लबों में आना-जाना रहता है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि लग्जरी लाइफ स्टाइल और मौज मस्ती के लिए गैंगस्टरों की चंडीगढ़ के क्लब पहली पसंद बन चुके हैं। गैंगस्टर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए छोटी सी बात पर भी किसी की आसानी से हत्या कर चंडीगढ़ से आसानी से फरार हो जाते हैं। पिछले कुछ आंकड़ों के मुताबिक, शहर में होने वाली हत्याओं की ज्यादातर वजह गैंगस्टर के आपसी विवाद होते हैं।
बाउंसर सुरजीत की हत्या भी इसी तरह हुई थी
17 मार्च 2020 की देर रात सेक्टर-38 वेस्ट स्थित स्मॉल चौक के पास बाइक सवार दो बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर सुरजीत बाउंसर की इसी तरह हत्या कर दी थी। सुरजीत के सिर में दो जबकि छाती के पास तीन गोलियां लगी थीं।
वारदात के बाद ऐसे ही गैंगस्टर दविंदर बंबीहा ग्रुप के फेसबुक अकाउंट पर सुरजीत की हत्या की जिम्मेदारी ली गई थी। यह मामला अब तक अनसुलझा है। वहीं अब गुरलाल की हत्या के बाद पुलिस की इन गैंगस्टरों पर सिरदर्दी बढ़ गई है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई समेत कई गैंग लगातार एक के बाद एक चंडीगढ़ में वारदात कर रहे हैं।
वर्चस्व कायम करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल
पुलिस के आला अधिकारियों का मानना है कि गुरलाल की हत्या के बाद फेसबुक पर पोस्ट डालकर जिम्मेदारी लेना पुलिस का ध्यान भटकाने की एक साजिश भी हो सकता है। ऐसे में पुलिस अब सभी पहलुओं पर जांच करने में जुटी हुई है।
साथ ही फेसबुक अकाउंट भी निगरानी कर रही है। बता दें कि बीते महीने पुलिस ने गैंगस्टर और करीबियों के करीब 90 अकाउंट बंद किए थे। इसके बावजूद गैंगस्टर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए अभी भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।
चंडीगढ़ में कब-कब हुईं वारदातें
1- नवंबर 2018 में सेक्टर-26 एफबार सांसद किरण खेर के राजनीतिक सलाहकार सहदेव सलारिया की बर्थडे पार्टी में गोलीबारी
2- सितंबर सेक्टर-17 थाने के सामने दो युवकों पर गोलियां बरसाईं, एक की मौत
3- दिसंबर 2019 को सेक्टर-15डी में हिंदुस्तान स्टूडेंट एसोसिएशन (एचएसए) से जुड़े दो छात्रों की हत्या
4- मार्च 2020 को सेक्टर-38 में बाउंसर की हत्या
5- मार्च 2019 को इनसो पार्टी के पूर्व प्रधान विशाल चिल्लर की गोली मारकर हत्या
6- सितंबर 2019 बुडै़ल में सोनू शाह पर गोलियां बरसाकर हत्या
7- मई 2020 को सेक्टर-33 में शराब कारोबारी के घर पर बरसाईं गोलियां
8- जून 2020 को सेक्टर 9 में ठेके पर बरसाई गई ताबड़तोड़ गोलियां
इस वारदात के बाद गैंगस्टर तक पहुंचने के लिए पूरी रणनीति बनाई गई है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर मामला सुलझा लिया जाएगा। इसके अलावा पुलिस की शहर के क्लब पर भी निगरानी है। चंडीगढ़ में हो रहे अपराध पर जल्द लगाम लगाया जाएगा।
- कुलदीप सिंह चहल, एसएसपी चंडीगढ़