इस वर्ष गणपति महोत्सव में मूर्तियों का खास रूप सामने होगा। गणपति महोत्सव 29 अगस्त से है। इसके लिए इन दिनों खास तौर पर पांच हजार मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।
इन्हें तैयार कर रहे हैं राजस्थान से आए दस मूर्तिकार। दिनरात मेहनत करके इन मूर्तिकारों ने बना डाली हैं तीन हजार मूर्तियां। इन मूर्तिकारों के पास घर में ले जाने के लिए भी मूर्ति उपलब्ध है और बड़े समारोह के लिए भी। गणपति की यह मूर्तियां हैं इकोफ्रेंडली। विसर्जित करने के बाद भी यह बहते हुए पानी पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं डालतीं।
खड़िया से बनाते हैं मूर्तियां
गणपति की मूर्ति को बनाने के लिए मूर्तिकार खड़िया का इस्तेमाल करते हैं। यह खड़िया राजस्थान से मंगाई जाती है। एक मूर्तिकार ने बताया कि तीन हजार मूर्तियां तैयार करने में करीब सात ट्रक खड़िया का इस्तेमाल किया गया है। मूर्तियां तैयार करने वाले फूलचंद मूर्तिकार ने बताया कि सबसे पहले मॉडल तैयार किया जाता है। मॉडल को तैयार करने के बाद इसकी डाई बना दी जाती है। डाई के माध्यम से हर मूर्ति को खास आकार दिया जाता है। एक मूर्ति को तैयार करने में करीब दो से तीन महीने तक लग जाते हैं। इसमें उसको सुखाना और उसके बाद फिनिशिंग करना भी शामिल होता है।
हरियाणा, हिमाचल से डिमांड
जीरकपुर सिंहपुरा मोड़ के समीप स्थित वर्कशाप में मौजूद मूर्तिकार फूलचंद मूर्तिवाला ने कहा कि गणपति उत्सव के लिए उनके पास हरियाणा, पंजाब, हिमाचल से आर्डर आए हैं। उन्होंने बताया कि दस फुट की 50 मूर्तियां तैयार की हैं।
बारिश में होती है परेशानी
बारिश के मौसम में मूर्तियों को सुरक्षित रखना, उन पर पेंट करना एक बड़ा चैलेंज है। हर मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए उसके ऊपर बरसाती डाल देते हैं।
एक फुट की मूर्ति 151 की
एक फुट की गणपति की मूर्ति 151 रुपये की है, जबकि दस फुट की मूर्ति तीन हजार रुपये तक की है।
क्यों बनाते हैं खड़िया मिट्टी से
मूर्तिकार जतिंदर कुमार बताते हैं कि खड़िया मिट्टी से मूर्ति इसलिए बनाई जाती है, जिससे जैसे ही गणपति पूजन के बाद मूर्ति को विसर्जित किया जाए तो वह पानी में घुल जाए।