फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh: हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने की पंजाब के एक जज को बर्खास्त करने की सिफारिश, हरियाणा के दो निलंबित

Wed, 27 Mar 2024 06:31 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा कैडर की अधिकारी ज्योति मेहरा फतेहाबाद जिला कोर्ट में तैनात थीं। मेहरा पिछले साल दिसंबर से बिना अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित थीं और उनके मामले में दो शिकायतें थीं। कुणाल गर्ग पलवल में तैनात थे और उनके खिलाफ भी कुछ शिकायतें पहुंची थीं। इन दोनों को लेकर चर्चा के बाद फिलहाल दोनों को निलंबित करने का हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने प्रशासनिक स्तर पर आदेश जारी किया है।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस के संदेश को जारी रखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की फुल कोर्ट बैठक में पंजाब के एक न्यायिक अधिकारी को बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है। वहीं हरियाणा के दो न्यायिक अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। फुल कोर्ट की यह बैठक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जीएस संधावालिया की अध्यक्षता में हुई थी।
विज्ञापन


पंजाब कैडर के न्यायिक अधिकारी सचल बब्बर बठिंडा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ आईं शिकायतों व गंभीर आरोपों के चलते उन्हें निलंबित किया था। निलंबन के बाद उनकी सेवा आगे बढ़ाने को लेकर फुल कोर्ट बैठक में चर्चा हुई और इसके बाद उनको बर्खास्त करने का निर्णय लेते हुए पंजाब सरकार को इसकी सिफारिश की गई है। 

हरियाणा कैडर की अधिकारी ज्योति मेहरा फतेहाबाद जिला कोर्ट में तैनात थीं। मेहरा पिछले साल दिसंबर से बिना अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित थीं और उनके मामले में दो शिकायतें थीं। कुणाल गर्ग पलवल में तैनात थे और उनके खिलाफ भी कुछ शिकायतें पहुंची थीं। इन दोनों को लेकर चर्चा के बाद फिलहाल दोनों को निलंबित करने का हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने प्रशासनिक स्तर पर आदेश जारी किया है।
विज्ञापन


अपने रिश्तेदारों को ही जज दे रहे रोजगार
प्रशासनिक स्तर पर हाईकोर्ट न्यायिक अधिकारियों के स्तर पर होने वालीं कई अनियमितताओं की जांच कर रहा है, जिसमें न्यायिक अधिकारी अपने ही रिश्तेदारों को अधीन कर्मचारी के रूप में काम करते हुए दिखा रहे हैं। अधिकारियों को राज्य सरकार की ओर से तय डीसी दरों पर चपरासी व ड्राइवर जैसे कर्मचारियों की भर्ती करने की अनुमति है, लेकिन वे अपने रिश्तेदारों को काम पर रखकर वित्तीय लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

लगातार भ्रष्टाचार पर प्रहार
इस फुल कोर्ट बैठक से पहले भी बीते साल हाईकोर्ट ने कई न्यायिक अधिकारियों को निलंबित कर दिया था, जबकि कई को बर्खास्त कर दिया था। हाईकोर्ट अधीनस्थ न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और अन्य कारकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है। अब तक दो दर्जन से अधिक न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, जिससे अधीनस्थ न्यायपालिका के बीच जीरो टॉलरेंस का एक मजबूत संदेश भेजा गया है।

यह होती है फुल कोर्ट
न्याय प्रदान करने से संबंधित प्रशासनिक मुद्दों और अधीनस्थ न्यायपालिका से संबंधित न्यायिक अधिकारियों और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से फुल कोर्ट आयोजित की जाती है। इस बैठक में मुख्य न्यायाधीश से लेकर हाईकोर्ट के सभी जज शामिल होते हैं और प्रशासनिक स्तर पर फैसले लेते हैं। ऐसी बैठकों में स्थानांतरण, पोस्टिंग, पदोन्नति और न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे निर्णय लिए जाते हैं। किसी भी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई से पहले हाईकोर्ट अपनी विजिलेंस कमेटी से जांच करवाता है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करता है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें