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हुसैनीवाला बार्डर: यहां दिखती है भारत-पाक के बीच ‘दोस्ती’ की गजब मिसाल

Wed, 11 Oct 2017 09:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हुसैनीवाला बार्डर
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हुसैनीवाला बॉर्डर रिट्रीट सेरेमनी - फोटो : Amar ujala
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भले ही पाकिस्तान और हिंदुस्तान में इन दिनों तनातनी का माहौल चल रहा है, लेकिन हुसैनीवाला बार्डर पर दोनों देशों के  बीच दोस्ती और सम्मान की गजब मिसाल रोजाना देखने को मिलती है। ये देश का वो बार्डर है, जहां भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज सूर्यास्त के दौरान एक-दूसरे की सरजमीं पर सम्मान के साथ उतारे जाते हैं। यहां कई दशकों से रोजाना यह रस्म चल रही है।
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वाघा बार्डर की तर्ज पर यहां हुसैनीवाला बार्डर पर भी रोजाना सुबह भारत और पाकिस्तान अपने-अपने एरिया में अपने राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। शाम के समय दोनों देशों की ओर से बेहतरीन परेड प्रस्तुत की जाती है। भारत की ओर से दिलावर खान टॉवर पोस्ट पर तैनात बीएसएफ के जवान परेड को करते हैं।

दोनों देशों के जवान जोशिले ढंग से इस परेड को इस कदर प्रस्तुत करते हैं कि परेड देखने आए हजारों दर्शकों में भी देशभक्ति हिलोरे लेने लगती है। माहौल पाक दर्शकों से उठने वाले ‘जीवे...जीवे पाकिस्तान’ व पाकिस्तान का मतलब क्या ‘ला इल्लाह इल अल्लाह’ और इंडियन दर्शकों से उठने वाले ‘वंदे मातरम’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’ व ‘भारत माता की जय’ के नारों से गुंजायमान हो जाता है। परेड से पहले व बाद में देशभक्ति के गीत भी दर्शकों के जोश को और बढ़ा देते हैं।
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जो अफसर सीनियर, वही देता है परेड की अनुमति

हुसैनीवाला बॉर्डर
सूर्यास्त के  कुछ मिनटों पहले इस परेड को संपन्न करना होता है। उस दौरान पेश की जाती है दोस्ती की अनूठी मिसाल। भारत के जवान पाकिस्तान और पाक के जवान इंडिया के सरजमीं पर आकर क्रास कर अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वजों को सम्मान के साथ उतारते हैं। दोनों देशों के राष्ट्रगान इस माहौल को उत्साह से भर देते हैं। उसके बाद दोनों जवान राष्ट्रीय ध्वजों को अपनी बाजुओं में उठाकर अपनी-अपनी जमीन पर वापस लौट आते हैं। उसके बाद दोनों देशों के जवान पीछे हटते हैं और बार्डर बंद कर दिया जाता है।

जो अफसर सीनियर, वही देता है परेड की अनुमति
हुसैनीवाला बार्डर पर परेड की एक खास बात यह भी है कि  परेड शुरू करने से पहले वहां मौजूद पाकिस्तान और भारत के अफसरों में से जो भी सीनियर होता है, दोनों देशों के जवान उसी सीनियर अफसर को सैल्यूट कर बाकायदा उसकी अनुमति लेकर परेड शुरू करते हैं। अमूमन ऐसा होता है कि एक दिन पाकिस्तान का आला अफसर मौजूद होता है और एक दिन हिंदुस्तान का। इस दौरान दोनों देशों के जवान एक-दूसरे की सरजमीं पर जाकर सीनियर अफसर को सैल्यूट कर अनुमति लेते हैं।
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