देश के उस सपूत को रहने के लिए सरकार की तरफ से आज तक मकान नहीं मिल पाया, जिसने देश की आजादी के लिए महीनों सलाखों के पीछे गुजार दिए। सरकार ने वादे किए, तमगे भी दिए। मगर आज भी यह स्वतंत्रता सेनानी किराए के मकान में अपना गुजर बसर करने को मजबूर है।
पंचकूला सेक्टर-8 में कई सालों से किराए के मकान में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी देशराज परदेसी ने स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाले आरक्षण कोटे पर दुरुपयोग होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जमीन अलाटमेंट पर 2 प्रतिशत कोटा स्वतंत्रता सेनानियों के लिए आरक्षित हैं। तीन बार जमीन के लिए अप्लाई किया, लेकिन हुडा(हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) ने आवंटन नहीं किया गया।
आरटीआई में मांगा जवाब पर नहीं मिला
84 वर्षीय देश राज परदेसी 23 दिसंबर 2014 को जनसूचना अधिकारी उपाध्यक्ष कार्यालय संपदा अधिकारी हुडा से आरटीआई के तहत देश राज परदेसी में फ्रीडम फाइटर कैटेगरी के जमीन अलाटियों के नाम मांगे थे, लेकिन हुडा की ओर से जानकारी नहीं दी गई। देश राज परदेसी 6 मरले के प्लॉट के लिए तीन बार पिंजौर, पंचकूला और रोहतक के लिए अप्लाई कर चुके हैं, लेकिन अबतक जमीन अलॉट नहीं हुई।
वहीं शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की याद में कार्यक्रमों का आयोजन करने वाले शहीद भगत सिंह जागृति मंच के अध्यक्ष जगदीश भगत सिंह से इस मसले पर बात की गई तो उन्होंने भी कहा कि जिले के एक मात्र स्वतंत्रता सेनानी देश राज परदेसी एक छह मरले का प्लाट अलाट किया जाना चाहिए।