चंडीगढ़। चंडीगढ़ के तीन पूर्व आईएएस अफसरों पर जनता के पैसों को उड़ाने का आरोप लगा है। तीनों अफसर 2015 में फ्रांस की यात्रा पर गए थे। उस दौरान अधिकारियों ने ये पैसे खर्च किए थे। इसका खुलासा चंडीगढ़ के महानिदेशक ऑडिट (केंद्रीय) की एक ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
महानिदेशक ऑडिट ने 2021-22 रिपोर्ट में शहर के तीन पूर्व आईएएस अधिकारियों पर विदेश दौरे के दौरान अतिरिक्त खर्च समेत कई सवाल उठाए हैं। इसमें पूर्व सलाहकार विजय देव, पूर्व गृह सचिव अनुराग अग्रवाल और सचिव विक्रम देव दत्त का नाम शामिल है। ये तीनों अधिकारी वर्ष 2015 में ली कॉर्बूजिए को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए फ्रांस गए थे।
2015 में अफसर गए थे फ्रांस
2015 में चंडीगढ़ प्रशासन को पेरिस स्थित फाउंडेशन ली कार्बूजिए से निमंत्रण आया था। यह कार्यक्रम स्विस-फ्रेंच वास्तुकार ली कार्बूजिए की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में था। ऑडिट ने कहा है कि इस में शामिल होने के लिए निमंत्रण शहर के चीफ आर्किटेक्ट को आया था, जबकि पहुंच तीन आईएएस अधिकारी गए थे। उसमें भी विदेश जाने के लिए ऑडिट के अनुसार तीनों अधिकारियों ने ही एक-दूसरे के टूर को मंजूरी दे दी। वहां जाने के बाद अधिकारियों ने होटल की बुकिंग में बदलाव किया, जिसकी वजह से करीब छह लाख रुपये अतिरिक्त चंडीगढ़ प्रशासन को देना पड़ा था। विदेश यात्रा के लिए शुरुआत में करीब 19 लाख रुपये मंजूर किए गए थे जब यात्रा समाप्त हुई तो करीब 25 लाख रुपये खर्च हुए।
17 कंडम गाड़ियों को प्रशासन ने नहीं किया डिस्पोज्ड ऑफ, ऑडिट ने जताई आपत्ति
ऑडिट ने कहा है कि विभाग ने बीते कुछ साल में कई वाहनों को कंडम घोषित किया लेकिन उन्हें डिस्पोज्ड ऑफ नहीं किया गया, जिसकी वजह से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है। ऑडिट ने पूर्व सलाहकार विजय देव समेत तीन पूर्व आईएएस अधिकारियों के विदेश दौरे के दौरान अतिरिक्त खर्च को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट (सेंट्रल) चंडीगढ़ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2021-22 के रिकॉर्ड की जांच के दौरान ऑडिट ने पाया है कि विभाग ने वर्ष 2020-21 और 2021-22 में 17 वाहनों को कंडम घोषित कर दिया लेकिन उन्हें डिस्पोज्ड ऑफ करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया, जिसकी वजह से यह वाहन आज तक डिस्पोज्ड ऑफ नहीं हो सके। इन कंडम कारों को डिस्पोज्ड ऑफ नहीं करना, यह नियमों के विरुद्ध है। इसकी वजह से सरकारी खजाने को भी राजस्व का नुकसान हुआ है। इसके अलावा ऑडिट में यह भी पाया गया है कि विभाग ने करीब 6.16 लाख रुपये की परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को वेरीफाई नहीं किया।
ऑडिट ने रिपोर्ट में कहा है कि हरियाणा के गुरुग्राम के ठेकेदार कुमार बिल्डिंग फैसिलिटी और पंचकूला के टैनी रिसोर्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को अगस्त 2021 को 23 एमटीएस और मार्च 2022 को दो स्टेनो सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। एक ठेकेदार ने 5.48 लाख और दूसरे ने 66.81 हजार रुपये की बैंक परफॉर्मेंस बैंक गारंटी दी लेकिन यह दोनों संबंधित बैंक से वेरीफाइड नहीं थे।
ऑडिट की तरफ से जब यह मुद्दा उठाया गया तो विभाग ने उन्हें जवाब दिया कि नियमों की जानकारी की कमी होने की वजह से ठेकेदारों ने वेरीफाई नहीं कराया, जिसे जल्द ही वेरीफाई करा लिया जाएगा।