नीरज ने अपने सीनियर अधिकारियों जेई संदीप धनखड़, एक्सईएन वीरेंद्र हुड्डा, एसडीओ सुरजीत व एसई विशाल बंसल से परमिशन लेकर मेरे भाई व तीन अन्य से पंप की सफाई करने को कहा। चारों ने कहा कि अंदर जहरीली गैस हो सकती है। इसके बावजूद चारों कर्मचारियों को नीचे उतार दिया गया। जैसे ही पंप को खोला, उसके अंदर से जहरीली गैस निकली, जिसके प्रभाव से चारों की मौत हो गई।
धर्मेंद्र व संजय का शव तुरंत निकाल कर पीजीआई ले जाया गया। जबकि अनिल व रणजीत का शव पंप हाउस में सीवर का गंदा पानी भरने से आठ घंटे बाद निकाला जा सका। प्रमेंद्र ने रणजीत के भाई तूफान के साथ मिलकर शिकायत दी है कि चारों की मौत पब्लिक हेल्थ के एसई विशाल बंसल, एक्सईएन विजेंद्र हुड्डा, एसडीओ सुरजीत कुमार, जेई संदीप धनखड़ व इलेक्ट्रिशियन नीरज की लापरवाही से हुई है। पुलिस ने पांचों के खिलाफ विभिन्न धाराओं व एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया।
चीफ इंजीनियर चंडीगढ़ से पहुंचे मौके पर
घटना की सूचना मिलने पर चीफ इंजीनियर अनिल कुमार पाहवा चंडीगढ़ से रोहतक पहुंचे और उन्होंने डिस्पोजल का मुआयना किया। अधिकारी ने पूरे मामले पर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं। इससे पहले घटना की सूचना मिलते ही सुबह मौके पर उपायुक्त आरएस वर्मा, एसडीएम राकेश कुमार, पब्लिक हेल्थ के अधीक्षण अभियंता विशाल बंसल, कार्यकारी अभियंता विजेंद्र हुड्डा, कार्यकारी अभियंता भानू प्रताप, डीएसपी ताहीर हुसैन, डीएसपी गौरखपाल आदि मौजूद रहे।
परिजनों ने प्रशासनिक अधिकारियों को घेरा
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पब्लिक हेल्थ के डिस्पोजल पर हादसे का शिकार हुए चार कर्मचारियों के परिजनों के साथ प्रशासन की सहानुभूति है। इनकी मौत के कारण में करंट, जहरीली गैस व पानी का भराव कुछ भी हो सकता है। इसकी मजिस्ट्रेट जांच होगी। जांच व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही फाइनल तौर पर मौजूद के कारण स्पष्ट हो सकेंगे। इस मामले में जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी। -आरएस वर्मा, उपायुक्त
परिजन बोले, मांगने पर नहीं कराए गए सुरक्षा उपकरण उपलब्ध
प्रमेंद्र ने आरोप लगाया है कि जिस समय अधिकारियों ने उसके भाई और अन्य को कहा था कि नीचे उतरकर पंप साफ करो तो उसने कहा कि चैंबर में खतरा बहुत है, इसके अंदर जहरीली गैस हो सकती है। सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाए। आरोप है कि इसके बावजूद नीरज ने कहा कि तुम्हारी जाति का यही काम है नीचे उतरकर सफाई करो।
इसके बाद ही चारों ने नीचे उतरकर काम शुरू किया था। इसके बाद गैस रिसाव से उनकी जान चली गई। पीड़ित का कहना है कि यदि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते तो हादसा नहीं होता। चारों की मौत पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों की लापरवाही से हुई है।