जेल से होटल ले जाने के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, पहले लगाई थीं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। 700 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के आरोपी विक्रम वाधवा को जेल से होटल ले जाने के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज मामले में बाद में ये धाराएं हटा दी गईं। इसके बाद जिला अदालत ने वाधवा के दोनों बेटों कुणाल और करण के साथ पुलिसकर्मियों जगमेहर और सुरिंदर को जमानत दे दी।
मेडिकल के बाद होटल ले जाने का आरोप
मामला पांच अगस्त का है। आरोप है कि पुलिसकर्मी जगमेहर और सुरिंदर जेल में बंद विक्रम वाधवा को मेडिकल जांच के लिए सेक्टर-16 अस्पताल लेकर आए थे। जांच के बाद उसे बुड़ैल जेल ले जाने के बजाय सेक्टर-17 स्थित होटल सिटी हार्ट ले जाया गया। वहां वाधवा के दोनों बेटे कुणाल और करण पहले से मौजूद थे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी मिली तो टीम ने होटल में छापा मारा। मौके से विक्रम वाधवा, उसके दोनों बेटों और दोनों पुलिसकर्मियों को पकड़ा गया। इसके बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया था। घटना के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया था।
गंभीर धाराएं हटने से मिली राहत
मामले की शुरुआत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई थीं, लेकिन जांच के दौरान इन्हें हटा दिया गया। इसके बाद केस में ड्यूटी में लापरवाही और साजिश से संबंधित धाराएं रह गईं। पुलिस की ओर से गंभीर धाराएं हटाए जाने के बाद मामले की प्रकृति बदल गई। बची धाराओं के जमानती होने के चलते अदालत ने चारों आरोपियों को जमानत दे दी।