तीन कैदियों से सोमवार को चार मोबाइल फोन, अफीम, गांजा और चरस मिलने पर बुड़ैल जेल में अफरा-तफरी मच गई। तीनों कैदियों को जेल की दीवार से 60 मीटर दूर 12 नंबर सेल के पास से पकड़ा गया। इनमें से एक कैदी सेल की छत पर चढ़ा हुआ था। सेक्टर-49 थाना पुलिस ने एडिशनल जेल सुपरिंटेंडेंट अमनदीप सिंह की शिकायत पर कैदी कुलदीप, अतुल और परमजीत सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। अब पुलिस तीनों कैदियों को जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ करेगी।
एक कैदी ने संतरी का ध्यान भटकाने के लिए 12 नंबर सेल की छत पर चप्पल फेंक दी। कैदी परमजीत चप्पल उठाने के बहाने छत पर चढ़ गया। इसी बीच संतरी ने उसे देख लिया। संतरी के पूछने पर परमजीत ने कहा कि उसके साथी ने मजाक में चप्पल छत पर फेंक दी है, जिसे उतारने के लिए वह ऊपर चढ़ा है। इसके बाद उसने संतरी के सामने ही चप्पल नीचे फेंक दी। इस बीच मौका देखकर उसने छत से मोबाइल और ड्रग्स को भी सेल के पीछे फेंक दिया। इसके बाद कैदी कुलदीप और अतुल मोबाइल और नशा उठाने के लिए बैरक के पीछे पहुंचे लेकिन संतरी ने दोनों को देख लिया। शक होने पर उसने तुरंत जेल के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद जेल अधिकारी मौके पर पहुंचे और परमजीत, अतुल और कुलदीप की तलाशी ली। इस दौरान उनके कब्जे से चार मोबाइल फोन, 2.87 ग्राम चरस, 15.87 ग्राम गांजा और 1.84 ग्राम अफीम बरामद हुई।
बाहर से छत पर फेंका गया या किसी ने अंदर पहुंचाया, जांच में जुटी पुलिस
12 नंबर सेल जेल की दीवार से महज 60 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह सेल दीवार के सबसे ज्यादा नजदीक है। ऐसे में इस बात की भी आशंका है कि जेल के बाहर से सेल की छत पर मोबाइल फोन और ड्रग्स को फेंका गया है। हालांकि जेल के बाहर से सटीक निशाना लगाकर सेल की छत पर सामान फेंकना आसान नहीं है। जेल के बाहर कैमरे नहीं लगे हैं इसलिए अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि बाहर से मोबाइल और ड्रग्स अंदर छत पर फेंका गया है या छुपाकर रखा गया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ करेगी कि उनके पास मोबाइल और ड्रग्स कैसे पहुंचा। जेल के कर्मचारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। उधर, सूत्रों ने बताया कि सोमवार दोपहर को ही जेल पर तैनात सीआरपीएफ की कंपनी बदली है। ऐसे में जांच की जा रही है कि क्या पुरानी कंपनी के किसी कर्मचारी ने तो कैदियों तक यह सामान पहुंचाने में मदद नहीं की।
आईजी की सख्ती के बाद दो महीने में पकड़े गए आठ मोबाइल
आईजी जेल दीपक पुरोहित की सख्ती के बाद दो महीने में बुड़ैल जेल में आठ मोबाइल बरामद हो चुके हैं। उन्होंने खुद पुलिस को जेल कर्मचारियों की भूमिका के बारे में पता लगाने के लिए कहा है। इससे पहले 29 अगस्त को बुडै़ल जेल की पांच नंबर बैरक में सर्च के दौरान नशा तस्कर से मोबाइल मिला था। 12 नवंबर को 9 नंबर सेल में गैंगस्टर मंजीत के पास से मोबाइल बरामद किया गया था। पुलिस ने इस मामले में जेल कर्मचारी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं, फरवरी 2022 को 8 नंबर बैरक से दीपक (37) और रजिंदर सिंह (38) से एक मोबाइल फोन, डिजिटल घड़ी, चार्जर, बैटरी, डाटा केबल और बिजली के तार बरामद हुए थे।
बैरकों में 24 घंटे पहरा, फिर भी मोबाइल चार्ज कर लेते हैं कैदी
जेल के भीतर बिजली के सॉकेट बैरकों के बाहर लगे हैं, जहां वार्डर व सुरक्षाकर्मियों का 24 घंटे पहरा रहता है। यहां से मोबाइल को सीधे चार्ज नहीं किया जा सकता। जेल में वायरिंग भी पूरी तरह से अंडरग्राउंड है। जेल में विरोधियों के बीच मोबाइल को चार्ज करना भी जोखिम भरा होता है। ऐसे में सवाल कि जेल में फोन की बैटरी चार्ज कहां से होती है? सूत्रों का कहना है कि कैदी जेल में जुगाड़ कर बल्ब, पंखे व तारों के सर्किट को चार्जिंग प्वाइंट बनाते हैं और यहीं से मोबाइल चार्ज करते हैं।
बुड़ैल जेल में बंद हैं पांच आतंकी, मिल चुका है आरडीएक्स
बुड़ैल जेल में जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भ्यौरा, लखविंदर लक्खा, गुरमीत सिंह और शमशेर सिंह जैसे खतरनाक आतंकवादी बंद हैं। बीते 23 अप्रैल की शाम को बुड़ैल जेल के पीछे आरडीएक्स मिला था। इस घटना के तार जर्मनी में बैठे आतंकी जसविंदर सिंह मुल्तानी से जुड़े। ऐसे में जेल में मोबाइल मिलना किसी खतरे से कम नहीं।