हरियाणा में अब इलेक्ट्रानिक्स वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा व इनकी किलेबंदी को और कड़ा किया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर हरियाणा सरकार सूबे के हर जिले में करोड़ों की लागत से ईवीएम वेयरहाउस तैयार कर रही है, जहां इन ईवीएम को कड़ी सुरक्षा के बीच रखा जा सके।
इसके लिए हरियाणा सरकार ने फिलहाल 80 करोड़ रुपये केबजट का प्रावधान किया है। हालांकि निर्माण कार्य का जिम्मा पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग को दिया गया है, लेकिन प्रोजेक्ट की पूरी निगरानी हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव करेंगे। पिछले दिनों मुख्य सचिव ने इस संबंध में एक बैठक भी ली थी।
प्रदेश में ईवीएम वेयरहाउस बनने के बाद कई तरह के सवालों पर विराम भी लग जाएगा। चुनावों के दौरान दूसरे राज्यों से मंगवाने का झंझट ही खत्म हो जाएगा। ईवीएम हरियाणा के हर जिले में वेयरहाउस में पड़ी रहेगी और चुनावों के दौरान इसका इस्तेमाल के बाद इसे फिर किलेबंद कर दिया जाएगा।
दूसरे राज्यों से ईवीएम मंगवाने पर कई विपक्षी दल रास्ते में ईवीएम बदले जाने के आरोप लगाते रहे हैं। दूसरा, इससे परिवहन खर्च भी बचेगा और ईवीएम हमेशा निगरानी में रहेंगी। संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सभी जिलों में वेयरहाउस बनाने का काम चल रहा है।
अंबाला में बनेगा सेंट्रलाइज्ड स्टोर
हर जिले में बनने वाले ईवीएम वेयरहाउस के लिए संबंधित जिलों के डीसी इसके लिए जमीन उपलब्ध करवाएंगे। जिलों में तीन कैटेगरी साइज 750 वर्ग मीटर, 1400 वर्ग मीटर और 2100 वर्ग मीटर के वेयरहाउस तैयार किए जाएंगे। लेकिन सबसे बड़ा सेंट्रलाइज्ड स्टोर 4000 वर्ग मीटर का अंबाला में तैयार होगा। इन सभी वेयरहाउस और सेंट्रलाइज्ड स्टोर पर 24 घंटे सुरक्षाकर्मियों की गारद रहेगी। जबकि हर एक ईवीएम 16 सील युक्त होगी। 31 मार्च 2020 तक इन वेयरहाउस को पूरा करने का टारगेट रखा गया है।
एक-एक मशीन पर रहेगी आयोग की निगरानी
इन वेयरहाउस में ईवीएम रखने के लिए एक विशेष प्रकार के रैक तैयार किए जा रहे हैं। दूसरा, हर मशीन निर्वाचन आयोग के ट्रैक पर रहेगी। किस नंबर की मशीन किस वेयरहाउस के किस रैक में पड़ी है, चुनाव आयोग ऑनलाइन इसकी जानकारी हासिल कर सकता है। यदि मशीन ईधर-उधर होती है, तो भी आयोग को मालूम चल जाएगा। हरियाणा में इस वक्त जो ईवीएम है, वे एम-3 हैं, जिनका पहली बार इस्तेमाल मई 2019 के लोकसभा चुनाव में किया गया है।