कैप्टन ने विशेषज्ञ ग्रुप को बताया कि राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर है और उसे मासिक 3360 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ है। इनमें जीएसटी के 1322 करोड़ रुपये, शराब पर राज्य की आबकारी 521 करोड़, मोटर व्हीकल टैक्स के 198 करोड़, पेट्रोल व डीजल पर वैट के 465 करोड़, इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी के 243 करोड़, स्टांप ड्यूटी के 219 करोड़ और नॉन-टैक्स राजस्व के 392 करोड़ रुपये के रूप में घाटा शामिल है।
बिजली दरों में रोजाना 30 करोड़ रुपये का घाटा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के नकदी के आदान-प्रदान में ठहराव आ चुका है। बिजली के उपयोग में 30 प्रतिशत कमी आई है और पंजाब राज्य बिजली बोर्ड को बिजली दरें एकत्रित करने में रोजाना 30 करोड़ रुपये का घाटा है। पंजाब के उद्योग ठप हैं, जहां एक प्रतिशत से भी कम काम चल रहा है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि भारत सरकार की तरफ से राज्य के जीएसटी का 4365.37 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बाकी है।
गेहूं की बंपर पैदावार ने जगाई उम्मीदें
मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं की बंपर पैदावार से कृषि ही एकमात्र उज्जवल पक्ष पेश कर रही है। इसके बाद कपास और धान की फसल आएगी। केंद्र सरकार ने मंडियों में अपनी उपज देरी से लाने वाले किसानों को बोनस देने की उनकी अपील को स्वीकार नहीं किया, जो कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए जरूरी था।