हरियाणा के उचाना के पूर्व विधायक एवं वर्तमान में जजपा नेता भाग सिंह छात्तर की हृदय गति रुकने से हिसार के निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 70 वर्ष के थे। बीमारी के चलते उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पूर्व में भाग सिंह छात्तर की बाईपास सर्जरी भी हो चुकी थी। उचाना की राजनीति में भाग सिंह छात्तर को कद्दावर नेता के रूप में जाना जाता था।
भाग सिंह छात्तर ने अपने जीवन में तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ा। दिग्गज नेता बीरेंद्र सिंह को हराकर एक बार विधायक भी बने और दो बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा भाग सिंह छात्तर एक बार 1998 में जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे। उनके निधन पर राजनीतिज्ञों, सामाजिक संस्थाओं सहित आमजन व उचाना की जनता ने शोक व्यक्त किया है। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव छात्तर में होगा।
भाग सिंह छात्तर ने वर्ष 1996 में समता पार्टी से चुनाव लड़ा था और तब उनका मुकाबला कांग्रेस तिवारी के बीरेंद्र सिंह से था। जिसमें वे चुनाव हार गए थे। इसके बाद वर्ष 2000 में भाग सिंह छात्तर ने इनेलो की टिकट पर चुनाव लडा और उस दौरान कांग्रेस के दिग्गज एवं वर्तमान में भाजपा नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह को हराया था।
इसके बाद भाग सिंह छात्तर ने इनेलो को अलविदा कह कर कांग्रेस का दाम थाम लिया था और वर्ष 2014 में कांग्रेस की टिकट पर उचाना हलके से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रेमलता से वो हार गए थे। कुछ समय पहले भाग सिंह छात्तर कांग्रेस पार्टी में अपनी अनदेखी के चलते उन्होंने डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में जजपा पार्टी का दामन थाम लिया था। भाग सिंह छात्तर अपने पीछे दो बेटे और भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
भाग सिंह छातर जिला परिषद चेयरमैन से बने विधायक
भाग सिंह छात्तर जींद जिला परिषद के दूसरे चेयरमैन पांच नवंबर 1998 में बने थे। करीब दो साल तक वह इस पद पर रहे। भाग सिंह छात्तर पांच नवंबर 1998 से 25 मार्च 2000 तक अध्यक्ष पद पर रहे थे। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में चौटाला ने भाग सिंह छातर को बीरेंद्र सिंह के मुकाबले में इनेलो की टिकट थमा दी थी। छात्तर ने इस चुनाव में बीरेंद्र सिंह को करारी पटखनी दी थी।