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हरियाणा की पहली महिला सांसद व पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल चंद्रावती का कोरोना से निधन

Sun, 15 Nov 2020 12:07 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, चरखी दादरी (हरियाणा)
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पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल चंद्रावती - फोटो : फाइल फोटो
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पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल, प्रदेश की पहली महिला सांसद, विधायक दल की नेता, अधिवक्ता और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंद्रावती ने उपचार के दौरान शनिवार देर रात पीजीआईएमएस रोहतक में दम तोड़ दिया। वह आपात विभाग में उपचार के लिए भर्ती थीं और कोरोना संक्रमित पाए जाने पर उन्हें ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कोविड अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया था। 

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92 साल की चंद्रावती चार नवंबर को उपचार के लिए आपातकालीन विभाग में आई थीं। उन्हें वार्ड नौ की यूनिट तीन में रखा गया था। डॉक्टरों ने संदेह होने पर उनका आरटीपीसीआर कोविड-19 का सैंपल टेस्ट कराया। पांच नवंबर को वह जैसे ही कोरोना संक्रमित मिलीं, उन्हें कोविड अस्पताल में बने ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक उन्हें दिल के वॉल्व की बीमारी थी। इसके चलते नब्ज में भी समस्या थी। दिल की धड़कन व डिस्क संबंधी समस्या का भी उपचार चल रहा था। 14 नवंबर को पूर्व उपराज्यपाल ने रात 10:45 बजे आखिरी सांस ली।

पंचतत्व में विलीन हुईं बहन चंद्रावती 
राजनीति में करीब बीस साल तक ईमानदार कार्यशैली और बेबाक बोल के कारण विशिष्ट पहचान बनाने वाली ‘बहन चंद्रावती’ रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। पीजीआई से दोपहर बाद करीब एक बजे उनका शव एंबुलेंस से उनके पैतृक गांव डालावास के लिए रवाना किया गया। करीब सवा तीन बजे उनके भतीजे अमन डालावास ने उन्हें मुखाग्नि दी। इससे पहले पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा। वहीं, मुख्यमंत्री मनोहर लाल समेत विभिन्न राजनेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है। 

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वह हमेशा बेटियों के हकों को लेकर आवाज उठाती रहीं और बाढड़ा के अलावा दादरी जिले को भी कई सौगातें दिलाईं। वह करीब आठ माह तक पुडुचेरी की उपराज्यपाल भी रही थीं। 

बंसीलाल जैसे बड़े चेहरे को दी थी मात
पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल सूबे की राजनीति में बहुत बड़ा चेहरा थे। चंद्रावती 1977 में लोकसभा चुनाव लड़कर हरियाणा की पहली महिला सांसद बनी थीं। उन्होंने बंसीलाल जैसे दिग्गज को पटकनी देकर अपने नाम का डंका बजवा दिया था।

ये है उनका राजनैतिक सफर
हरियाणा विधानसभा की पहली महिला विधायक का गौरव भी उन्हें ही प्राप्त है। 1964 से 1966 और 1972 से 1974 तक वो दो बार मंत्री भी बनीं। 1982 से 1985 तक विपक्ष की नेता बनीं। फरवरी 1990 से दिसंबर 1990 तक पुडुचेरी की उपराज्यपाल और 1977 से 1979 तक जनता पार्टी की अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने काम किया।

इन्होंने दी अंतिम विदाई
उनकी अंतिम यात्रा में पूर्व मंत्री प्रोफेसर चतर सिंह, पूर्व विधायक रणबीर मंदोला, पूर्व विधायक जगजीत सांगवान, तहसीलदार शेखर, बीडीपीओ युद्धवीर, नगराधीश सुरेश, डीएसपी अनिल डुडी, विजय मंदोला, मास्टर टेकराम आर्य, कांग्रेस युकां अध्यक्ष अनिल धनखड़, आनंद सांगवान, सुधीर चांदवास, विजय पंचगांव, डालावास पूर्व सरपंच करतार सिंह, प्रेरक संघ प्रधान विनोद मांढ़ी आदि शामिल हुए। 
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उम्र के अंतिम पड़ाव में सीएम को लिखा दादरी में कॉलेज खोलने का पत्र

चंद्रावती ने गांव डालावास में हाईस्कूल और बाढड़ा में बिजली सब स्टेशन का निर्माण करवाया। इसके अलावा उन्होंने बाढड़ा को ब्लॉक का दर्जा दिलाया। लड़कियों की शिक्षा के लिए कन्या गुरुकुल में योगदान दिया। दादरी से डालावास होते हुए सड़क का निर्माण करवाया। अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्होंने सीएम मनोहर लाल को दादरी जिला मुख्यालय पर पीजी कॉलेज खोलने के लिए पत्र लिखा था।
पूर्व उपराज्यपाल चंद्रावती ने पीजीआईएमएस में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया है। वह कोरोना संक्रमित थीं और ट्रॉमा सेंटर में उपचाराधीन थीं। उनके शव को पूरे राजकीय सम्मान और कोविड-19 की जारी गाइडलाइन के हिसाब से भेजा गया है। - डॉ. संदीप, डीएमएस, आपातकालीन विभाग, पीजीआईएमएस।

सीएम मनोहर लाल और पूर्व सीएम हुड्डा ने जताया शोक
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल व प्रदेश की पहली महिला सांसद चंद्रावती के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जताई। मुख्यमंत्री ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी वरिष्ठ कांग्रेस नेता चंद्रावती के निधन पर गहरा शोक जताया है। हुड्डा ने कहा कि उनके निधन से देश और प्रदेश की राजनीति को कभी ना पूरी होने वाली क्षति पहुंची है। ईमानदारी, कर्मठता और सेवा भाव ही उनकी पहचान थी। चंद्रावती उच्च सिद्धांतों का पालन करते हुए, उच्च पदों को सुशोभित करने वाले विरले नेताओं में से थीं। उन्होंने मेरे पिता रणबीर सिंह हुड्डा के साथ भी काम किया। मुझे भी उनके साथ काम करने का मौका प्राप्त हुआ। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की।
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