पंजाब के सीनियर आईपीएस अधिकारी और डीजीपी पद पर रह चुके वीके भावरा ने राज्य के मौजूदा कार्यकारी डीजीपी गौरव यादव के पद पर बने रहने को केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) में चुनौती दी है। वीके भावरा इस समय पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद पर तैनात हैं। उन्हें पिछले साल डीजीपी पद पर रहते हुए दो माह की छुट्टी से लौटने के बाद पीपीएचसी का चेयरमैन लगा दिया गया था और उनके स्थान पर गौरव यादव को कार्यकारी डीजीपी लगाया गया था। कैट में भावरा की याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।
एडवोकेट जीएस पटवालिया के जरिए कैट में दायर की गई याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार और यूपीएससी को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में वीके भावरा ने कहा है कि उनके डीजीपी पद से हटने के बाद राज्य सरकार ने गौरव यादव को डीजीपी नियुक्त करने में यूपीएससी और अन्य संबंधित प्रोसिजर का पालन नहीं किया।
याचिका में कहा गया है कि सरकार ने गौरव यादव को एक साल से ज्यादा समय से डीजीपी पद पर नियुक्त किया हुआ है जबकि इसके लिए न तो यूपीएससी को अफसरों का पैनल भेजा गया है और न ही गौरव यादव की नियुक्त पैनल के आधार पर हुई है। वीके भावरा 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने गौरव यादव की वरिष्ठता पर भी सवाल उठाया है, क्योंकि गौरव यादव 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। याचिका में कहा गया है कि डीजीपी पद के लिए वरिष्ठता सूची में गौरव यादव से आगे कई अधिकारी हैं।