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पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का आरोप: आर्थिक संकट के मुहाने पर पहुंच गया है हरियाणा, श्वेत पत्र जारी करे सरकार

Thu, 14 Jul 2022 12:46 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के साथ ही बीसी की जातिगत जनगणना की भी अधिसूचना जारी करनी चाहिए थी। इसके बिना आयोग पिछड़े वर्गों से न्याय नहीं कर पायेगा।
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Bhupinder Hooda - फोटो : pti
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विस्तार
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नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि गठबंधन सरकार ने हरियाणा को आर्थिक संकट के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। महज ढाई करोड़ की आबादी वाले प्रदेश पर आज 3,24,448 करोड़ रुपये का कर्ज है। सरकार इस पर श्वेत पत्र जारी करे। हुड्डा ने यहां अपने निवास पर पत्रकार वार्ता में यह बात कही। 

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उन्होंने कहा सरकार बताए कि इतना कर्ज क्यों लेना पड़ा और यह कहां खर्च हुआ। सरकार की गलत आर्थिक नीतियों ने प्रदेश को कर्ज के दलदल में डुबो दिया है। 2014 से पहले प्रदेश पर जीएसडीपी का 16 प्रतिशत कर्ज था, जो आज बढ़कर 27.8 प्रतिशत हो गया है। राज्य की देनदारियों में भी 3.13 गुणा बढ़ोतरी हुई है। 

प्रदेश में फीता काटो सरकार चल रही है। पंचकूला में बना राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) इसका उदहारण है। प्रदेश में निवेश तभी आएगा जब बेहतर कानून व्यवस्था के साथ सुरक्षित माहौल होगा। कांग्रेस सरकार में जापान का 70 प्रतिशत निवेश अकेले हरियाणा के गुरुग्राम में हुआ था। आज प्रदेश का हर नागरिक को खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। जनता सुरक्षित है और ना ही जनप्रतिनिधि। विधायकों तक को रंगदारी और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का अगला ‘विपक्ष आपके समक्ष’ कार्यक्रम 21 अगस्त को यमुनानगर में होगा।    
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जातिगत जनगणना के साथ ही पिछड़ा वर्ग आयोग का औचित्य
हुड्डा ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने के साथ जातिगत जनगणना का प्रावधान करना चाहिए था। जातिगत जनगणना से पता चलेगा कि किस वर्ग के लोगों की जनसंख्या कितनी है। क्रीमीलेयर की आय सीमा को 8 से घटाकर 6 लाख करने का मकसद पिछड़ों को आरक्षण से वंचित करना है।

4.76 लाख की पेंशन काटी
भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने बुजुर्गों और बेसहारा बच्चों की पेंशन पर प्रहार किया है। पिछले कुछ महीनों में 4 लाख 76 हजार बुजुर्गों की पेंशन काटी गई है। सरकार की मदद पर आश्रित 38 हजार बेसहारा बच्चों को मिलने वाली आर्थिक मदद भी सरकार ने रोकी है।

नई विधानसभा से चंडीगढ़ पर कमजोर होगा दावा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गठबंधन सरकार चंडीगढ़ पर प्रदेश की दावेदारी को कमजोर करने में लगी है। अपने ही प्रदेश की राजधानी में 10 एकड़ जमीन के लिए यूटी प्रशासन को 550 करोड़ रुपये भुगतान करना अनुचित है। चंडीगढ़ पर 60:40 के अनुपात में हरियाणा का पूर्ण अधिकार है। अगर विधानसभा भवन छोटा पड़ रहा है तो मौजूदा विधानसभा के साथ ही नया भवन बनाना चाहिए। जिस रेट पर सरकार 10 एकड़ जमीन ले रही है, अगर उसी हिसाब से देखा जाए तो 28000 एकड़ में फैले चंडीगढ़ में हरियाणा के हिस्से 12000 एकड़ जमीन आती है। इस हिसाब से अगर हरियाणा को 6 लाख करोड़, हिंदी भाषी क्षेत्र और उसके हिस्से का पानी मिलता है तो हरियाणा अपनी अलग राजधानी बनाने के लिए तैयार है। 

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