कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के प्रमुख रहे जनरल वीपी मलिक ने अपनी निजी राय में कहा कि मेजर लितुल गोगोई को चार्जशीट किया जाना चाहिए था, जबकि आर्मी की तरफ से गोगोई को सम्मानित करने की बात हो रही है। भले ही मेजर गोगोई की मंशा ठीक हो, लेकिन ऐसा करना आर्मी के हित में नहीं है।
एक बार चार्जशीट कर देते, फिर भले ही सजा न देते। चूंकि कश्मीर के लोग और कई दल इस हरकत का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में आर्मी की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है। दरअसल, मेजर लितुल गोगोई ने फारूख दर नाम के एक व्यक्ति को जीप के आगे बांधकर घाटी में घुमाया था। उसके बार से ही उनका विरोध हो रहा है।
पीयू स्थित डिफेंस एंड नेशनल सिक्योरिटी स्टडी विभाग की तरफ से जम्मू एंड कश्मीर के हालात पर एक थिंक टैंक सेमिनार का आयोजन कराया गया। इसमें पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा, रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह सहित कई रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर पहुंचे। इस दौरान सवाल जवाब सेेशन भी हुआ।
वर्दी सुधारने के लिए कई बार कहा
पूर्व आर्मी चीफ वीपी मलिक
जनरल वीपी मलिक ने कहा कि घाटी में पुलिस, पैरा मिलिट्री फोर्स और आर्मी एक जैसी वर्दी पहनते हैं, जो ठीक नहीं है। इससे ऐसा लगता है कि हर जगह सिर्फ आर्मी है। असल में ऐसा नहीं है। उन्होंने कई बार एमएचए को इस बारे में लिखा कि वर्दी का पैट्रन ठीक किया जाना चाहिए और सभी फोर्स अपने-अपने पैटर्न की वर्दी पहनें, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।
काफी समय से यूनिफाइड कमांड की बैठक नहीं हो रही है, जो बेहद जरूरी है। उन्होंने इससे भी बुरे हालात देखें। कश्मीर का मुद्दा राजनीतिक है, लेकिन यह आर्मी के बिना संभव नहीं है। हालात में सुधार होगा। सबसे पहले सांप्रदायिक बोल बंद करने होंगे। वहीं आर्मी पर राजनैतिक प्रभाव पर जनरल मलिक ने कहा एक -दो के दबाव से आर्मी पूरी तरह से पालिटिकल नहीं हो सकती।