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पिछले दो साल से शिक्षकों को शोध को बढ़ावा देने के लिए नहीं मिल रहा बजट

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से शिक्षकों को पिछले दो साल से शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रति अकादमिक सत्र मिलने वाले 20 हजार रुपये नहीं दिए जा रहे हैं। शिक्षक इस राशि का उपयोग सेमिनार, क्रॉन्फ्रेंस व अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने में करते थे। पहले कोरोना महामारी के कारण दो साल यह राशि शिक्षकों को नहीं मिली, इसके बाद पीयू ने इंप्रूवमेंट ऑफ एजुकेशन का नाम बदलकर इंपीटैस ऑफ रिसर्च रख दिया। इसके तहत विदेश जाने वाले फंड आदि को भी इसमें जोड़कर फंड बढ़ाने की सिफारिशें की थीं।
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पुटा अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय ने बताया कि पहले कोरोना महामारी के चलते शिक्षकों का फंड नहीं मिलने से शोध का काम प्रभावित हुआ। अब तक इंपीटैस ऑफ रिसर्च इकाई के नियम व नीति नहीं बनाई गई है, जिससे शिक्षक इस फंड के लिए क्लेम नहीं कर पा रहे हैं। इसका नकारात्मक प्रभाव शिक्षकों की ओर से शोध के लिए ज्वॉइन किए जाने वाले सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और देश-विदेश के दौरे पर पड़ रहा है। शिक्षकों को स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए कैसे क्लेम किया जाए। आगामी दिनों में नैक का दौरा है। नैक इस बिंदु को प्रमुखता से देखता है कि शोध के लिए इस फंड को कितने शिक्षकों ने क्लेम किया। इसका असर नैक के शोध और परसप्शन पर पड़ता है। इस मुद्दे को लेकर पुटा की ओर से वीसी को पत्र भी लिखा गया है।
शिक्षक करेंगे पीयू परिसर में पेट्रोलिंग
पीयू प्रशासन की ओर से छात्रावास वार्डन और कई शिक्षकों को पीयू परिसर में पेट्रोलिंग करने की जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षक पीयू में सिक्योरिटी के लिहाज से पेट्रोलिंग करेंगे और जरूरत पड़ने पर इसकी जानकारी चीफ सिक्योरिटी अफसर को मुहैया करवाएंगे। इस आदेश को लेकर शिक्षकों ने नाराजगी जताई है, शिक्षकों का कहना है कि वे छात्रों की पढ़ाई, शोध और अकादमिक कार्यों की जिम्मेदारी लें या पीयू के सिक्योरिटी के कामों को देखें।
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