चंडीगढ़। काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल थैरेपी (कार टी-सेल थैरेपी) का तीन मरीजों पर ट्रायल सफल होने के बाद पीजीआई ने लिम्फोमा के एक मरीज पर तकनीक का उपयोग क्लीनिकल रूप से शुरू किया है। पीजीआई देश का पहला चिकित्सा संस्थान बन गया है, जहां इस थैरेपी का उपयोग शुरू किया गया है। यह उपलब्धि पीजीआई के क्लीनिकल हेमेटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के हिस्से जाती है, जिसके विशेषज्ञों ने वर्षों की मेहनत के बाद इस थेरेपी को देश में शुरू करने में सफलता हासिल कर लिम्फोमा के मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है। इस तकनीक से विदेश में इलाज कराने पर जहां 4 से 5 करोड़ का खर्च आता है, वहीं पीजीआई में सिर्फ 25 से 30 लाख रुपये में इलाज संभव होगा। क्लीनिकल हेमेटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव प्रकाश ने बताया कि लिम्फोमा के जिन मरीजों पर कीमो और दवाओं का असर नहीं आता उन्हें इस थेरेपी की जरूरत पड़ती है। पीजीआई इस थेरेपी का उपयोग शुरू कर देश के इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंट की सूची में शीर्ष पर आ गया है। इसे लेकर पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रयास किया जा रहा था। इससे जुड़ी ट्रायल की प्रक्रिया पूरी करने के बाद क्लीनिकल रूप से इलाज शुरू कर दिया गया है। जिस मरीज को थेरेपी दी गई है उसका लगातार फॉलोअप किया जा रहा है ताकि उस पर थेरेपी के परिणाम का आकलन किया जा सके। फिलहाल सकारात्मक रिपोर्ट सामने आ रही है।