चंडीगढ़ के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी, वो ये कि उनके पेड़ को समय कम होने की वजह से चंडीगढ़ हेरिटेज का दर्जा मिल सकता है। ऐसे में अब वे भी अपने पेड़ को हेरिटेज लिस्ट के लिए दावा कर सकते हैं। अब आप अपने घर, सेक्टर या आसपास देखे हुए पुराने पेड़ की फोटो एवं थोड़ी सी जानकारी भेजकर यह दावा कर सकते हैं। जी हां, सिटी के लोगों की लगातार चंडीगढ़ फारेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट के पास चंडीगढ़ हेरिटेज पेड़ों पर एक बार और सर्वे करने के सुझाव को मान लिया गया है।
विभाग के मुख्य वन संरक्षक यूटी आईएफएस संतोष कुमार ने बताया कि उनके पास लगातार सिटी के लोगों की ओर से बताया जा रहा था कि सिटी में अन्य कई ऐसे पेड़ हैं जो हेरिटेज की लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। इसी सुझाव को देखते हुए अब विभाग की ओर से सिटी के लोगों से हेरिटेज पेड़ की जानकारी एवं फोटो के आवेदन मांगने की तैयारी कर ली है। गौरतलब है कि चंडीगढ़ प्रशासक ने 21 दिसंबर 2017 से सिटी के 31 पेड़ों को हेरिटेज का दर्जा दिया है। जिसमें सुखना लेक के पीपल के पेड़ को एक खास जगह दी गई है। यह पेड़ हेरिटेज लिस्ट में सबसे पुराने पेड़ों में से एक हैं।
आप कर सकते हैं आज से आवेदन
मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि इस आवेदन के लिए सिटी के लोगों को एक महीने का समय दिया गया है। वे ऐसे पेड़ की कुछ फोटो एवं उनकी थोड़ी सी जानकारी सहित दस्तावेज चंडीगढ़ वन विभाग में जमा कर सकते हैं। आवेदन के लिए शहरवासियों को एक महीने का समय दिया गया है। इच्छुक 24 मई तक आवेदन कर सकते हैं या वे विभाग की आफिशियल ईमेल के जरिए भी अपनी एंट्री भेज सकते हैं। आईएफएस संतोष कुमार ने बताया कि सिटी ब्यूटीफुल में 31 पेड़ों को हेरिटेज का दर्जा दिया गया है, लेकिन यहां ओर भी हेरिटेज पेड़ हो सकते हैं, इसलिए यह आवेदन मांगे जा रहे थे, ताकि ओर पेड़ों को इस लिस्ट में शामिल किया जा सके।
आवेदन के बाद गठित कमेटी करेगी उन पेड़ों की जांच एवं सर्वे
उन्होंने बताया कि 24 मई तक शहरवासियों के जो आवेदन आएंगे, उन की जांच गठित कमेटी की ओर से की जाएगी। इसके बाद चयनित पौधों पर सर्वे किया जाएगा। जिसके बाद उन्हें चंडीगढ़ हेरिटेज पेड़ की लिस्ट में शामिल किया जाएगा।
जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया देहरादून के एक्सपर्ट को किया जाएगा आमंत्रित
आईएफएस संतोष कुमार ने बताया कि सिटी में पाए गए इन 31 हेरिटेज पेड़ों की स्टडी विशेषज्ञों के लिए खजाना साबित होगी। इसलिए वे इन पेड़ों की स्टडी के लिए जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया देहरादून से एक्सपर्ट को आमंत्रित करने की भी प्लानिंग कर रहे हैं। देश के दूसरे सबसे बडे़ इस संस्थान के स्टूडेंट की ओर से होनी वाली यह स्टडी कई रोचक बातें प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा पंजाब यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग के विद्यार्थियों को भी इन पर स्टडी करने का मौका दिया जाएगा।
250 मीटर दूरी पर है सुखना लेक का यह खूबसूरत पेड़
1958 में सुखना लेक के निर्माण से पहले ही यह पेड़ था। जिसको काटने के लिए जब प्रशासन ने कार्रवाई करनी चाही, तो नेकचंद जी ने इसकी रोज निगरानी करनी शुरू कर दी थीं। सुखना लेक के अस्तित्व में आने से पहले जन्मे इस पेड़ की छाए स्वयं नेक चंद जी को बेहद पसंद थीं। वे जब भी थक जाते थे, तो यहां आकर आराम करते थे। यह छायादार पेड़ सुखना लेक पर आने वाले हर पर्यटक व शहरवासी के दिल में खास जगह रखता है।