चंडीगढ़। शहर का फूड बिजनेस, जो कभी आधी रात तक गुलजार रहता था, अब गैस की किल्लत और सिलेंडरों की कालाबाजारी के चलते मंदी की चपेट में आ गया है। सेक्टर-26, 35 और आईटी पार्क के क्लाउड किचन जो पूरी तरह ऑनलाइन डिलीवरी पर निर्भर थे, अब ऑफलाइन होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इसका सीधा असर डिलीवरी ब्वॉय पर पड़ा है, जिनकी दिहाड़ी आधी रह गई है। गैस सप्लाई चेन टूटने से शहर के करीब 100 से अधिक क्लाउड किचन प्रभावित हुए हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण छोटे स्टार्टअप्स और होम-शेफ्स ने जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी कम कर दी है। जो किचन पहले दिनभर में 100 ऑर्डर तक पूरा करते थे, वहां अब बमुश्किल 15 से 20 ऑर्डर ही आ रहे हैं।
कमाई पर पड़ा सीधा असर
मंडी और रेस्टोरेंट्स में काम करने वाले हेल्पर, कुक और सफाई कर्मचारियों की स्थिति सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। काम घटने के कारण मालिकों ने स्टाफ कम कर दिया है। पहले जहां कारीगर 15,000 से 18,000 रुपये महीना कमा लेते थे, वहीं अब उनकी आमदनी घटकर 5,000 से 6,000 रुपये तक रह गई है।
पीक आवर्स के दौरान सुस्त नजर आ रहे रेस्टोरेंट
शहर के मुख्य बाजारों में भी रेस्टोरेंट पीक आवर्स के दौरान सुस्त नजर आ रहे हैं। गैस बचाने के लिए कई आउटलेट्स ने अपना मेन्यू सीमित कर दिया है। तवा और कड़ाही पर बनने वाले व्यंजन बंद कर अब तंदूर आधारित डिशेज पर जोर दिया जा रहा है, जिससे किचन में आधे स्टाफ की जरूरत खत्म हो गई है।
कालाबाजारी का आरोप
क्लाउड किचन संचालकों का आरोप है कि प्रशासन गैस की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में नाकाम रहा है। बाजार में सिलेंडर की भारी कमी के बावजूद ब्लैक में 2,500 से 3,000 रुपये तक में गैस मिल रही है। महंगी गैस के चलते किचन चलाना अब घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
दिहाड़ी घटकर आधी रह गई
अब ऑर्डर भी कम आ रहे हैं और कंपनियां भी कम पैसे दे रही हैं। इसकी वजह से हमारी दिहाड़ी घटकर आधी रह गई है। खाना भी महंगा हो गया है और कुछ क्लाउड किचन ने काम कर दिया है, जिसकी वजह से ऐसा हो रहा है। -रमेश कुमार, डिलीवरी ब्वॉय
कमाई काफी कम रह गई है
हमारे लिए मुश्किल बरकरार है। हमको अभी पहले की अपेक्षा कम ऑर्डर मिल रहे हैं। इसकी वजह से दिहाड़ी पर सीधा असर पड़ रहा है। पहले से अब कमाई काफी कम रह गई है। -अवनीश कुमार, डिलीवरी ब्वॉय