तय समय पर काम नहीं होने पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, 6 दिन शेष
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मानसून आने में सिर्फ चंद दिन ही बचे हैं, मगर बाढ़ रोकने की तैयारियां अधूरी हैं। आठ शहरों की करीब 380 ड्रेनों की सफाई अब तक नहीं हो पाई है। इसके अलावा सरकार ने बाढ़ संभावित 320 हॉट स्पॉट चिह्नित किए थे, जिनमें से पांच जिलों के 100 हॉट स्पॉट पर अब तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है। सरकार ने 30 जून तक काम पूरे होने की समय सीमा तय कर रखी है। सीएम ने अधिकारियों को तेजी से काम करने के निर्देश देने के साथ चेतावनी दी है कि यदि ड्रेनों की सफाई न होने वजह से बाढ़ का खतरा बना तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश सरकार को रिपोर्ट मिली है कि फरीदाबाद, सोनीपत, अंबाला, फतेहाबाद, कैथल, सिरसा, भिवानी और पानीपत की 380 ड्रेनों की सफाई का काम अब तक दस फीसदी भी नहीं हुआ है। अधिकारियों की लापरवाही से ड्रेनें गंदगी और घास-फूस से अटी हैं। पानी की मात्रा अधिक होने पर ड्रेनें ओवरफ्लो हो सकती हैं। इससे आसपास के इलाकों में पानी भर सकता है। इसके अलावा सिरसा, अंबाला, करनाल, सोनीपत, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में चिह्नित किए गए 100 हॉट स्पॉट पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ है। पिछले दिनों सीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी ये मुद्दे उठाए गए थे और इस पर सीएम ने नाराजगी जाहिर की थी।
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टांगरी व मारकंडा की न गाद निकाली और न पक्के तटबंध बनाए
पिछले साल टांगरी व मारकंडा नदी में आई बाढ़ ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया था, लेकिन सिंचाई विभाग ने इससे ने कोई सबक नहीं लिया। अब तक दोनों ही नदियों की गाद नहीं निकाली गई है। न ही पक्के तटबंध बनाए गए हैं। साथ ही ओटू हेड की भी सफाई नहीं हो सकी है। पिछले साल जब बाढ़ आई थी तो पूर्व गृह मंत्री अनिल विज ने पत्र लिखकर पक्का तटबंध बनाने का आग्रह किया था, मगर अब तक इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका है। बताया जा रहा है नदी में रेत का स्तर काफी बढ़ा हुआ है, जिससे पानी के सुचारू प्रवाह के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। यही हाल मारकंडा नदी का है। मारकंडा नदी पर भी पक्का तटबंध बनाने की बात हुई थी, मगर यह भी काम अब तक पूरा नहीं हो सका है।
घग्गर व सिरसा नदी के साइफन साफ नहीं हुए
पिछले दिनों बाढ़ से निपटने के इंतजामों की समीक्षा बैठक में सरकार ने पाया कि घग्गर, मारकंडा और सिरसा नदी के साइफन अब तक साफ नहीं किए गए हैं। साइफन पर काफी गाद जमा है। पानी की मात्रा अधिक होने पर बाढ़ आने का खतरा रहेगा। इसके अलावा कुरुक्षेत्र की सरस्वती नदी की भी सफाई नहीं हो पाई है।
शहरों में साफ सफाई के निर्देश
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सुभाष सुधा ने बताया, सभी निकाय संस्थाओं के साथ साथ इनके साथ जुड़े अन्य विभागों को भी नालों, सीवर समेत नालियों की सफाई के आदेश दिए गए हैं। इस काम के लिए 30 जून का समय दिया गया है। इस कार्य को दुरुस्त कर लिया जाएगा। पिछली बार आई बाढ़ को देखते हुए शहरों में पुख्ता तैयारियां की जा रही हैं और किसी को दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
मंत्री और अधिकारी फील्ड में कर रहे निरीक्षण
इस बार कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। यदि पिछले साल की तरह बाढ़ के हालात बने तो दोषी अधिकारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। नदियों व नहरों की साफ-सफाई के लिए विभाग को जेसीबी किराए पर लेने के निर्देश दिए गए हैं। हमारे सिंचाई मंत्री व अधिकारी दौरे पर जा रहे हैं और कामों का निरीक्षण कर रहे हैं। उपायुक्तों को भी निर्देश दिए हैं कि वह फील्ड में जाएं और काम की समीक्षा करें।
नायब सिंह सैनी, सीएम हरियाणा
80 प्रतिशत काम अधूरा, विधानसभा कमेटी करे जांच
मौसम विभाग के पिछले साल के मुकाबले इस साल अधिक बारिश होने का अलर्ट देने के बाद भी अब तक बाढ़ नियंत्रण के लिए जरूरी पानी निकासी, ड्रेनेज निर्माण, स्टड लगाने, तटबंध मजबूत करने के 80 प्रतिशत से ज्यादा काम अधूरे पड़े हैं। पिछले साल बाढ़ के कारण 12 जिलों के लोगों को जानमाल के साथ पशुओं की मौत और फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान झेलना पड़ा था। इस बार भी जनता को उसके ही भरोसे छोड़ दिया गया है। कांग्रेस और भाजपा के 19 साल के शासन में जारी बजट को कहां और कैसे खर्च किया गया उसकी भी विधानसभा की कमेटी से जांच कराई जानी चाहिए- अभय चौटाला, विधायक, इनेलो
कई जगहों पर 100 फीसदी काम पूरा
फील्ड पर काम चल रहा है। कुछ प्रक्रियाओं में समय लगता है। कई जगहों पर सौ फीसदी काम हो चुका है। जहां काम लंबित है, वहां तेजी से काम किए जा रहे हैं। मुझे लगता है कि मानसून आने से पहले तक लंबित कामों को काफी हद तक पूरा कर लिया जाएगा। - अभय सिंह यादव, सिंचाई व जल संसाधन मंत्री, हरियाणा