दरअसल, इनेलो विघटन के बाद इनेलो के सिंबल से लड़ने वाले चार विधायकों डबवाली से नैना चौटाला, उकलाना से अनूप धानक, दादरी से राजदीप फौगाट और नरवाना से पिरथी सिंह नंबरदार का झुकाव डा. अजय चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जजपा) की ओर हो गया था। बाद में इन चारों विधायकों ने जजपा का खुला समर्थन करते हुए इनेलो के खिलाफ बगावती सुर दिखाने शुरू कर दिए थे।
ये विधायक न केवल जजपा का मंच सांझा करते थे, बल्कि उनके प्रचार में भी पूरे एक्टिव थे। चूंकि ये चारों विधायक अभी औपचारिक रूप से इनेलो सिंबल पर ही विधायक थे और इसी हैसियत से उनकी हरियाणा विधानसभा में अभी सदस्यता भी बरकरार थी। इसलिए इनेलो के विधायक व पूर्व नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने पिछले दिनों स्पीकर को शिकायत पत्र भेजकर इन चारों विधायकों को बागी करार देते हुए चारों के खिलाफ दलबदल एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता रद करने की मांग की थी।
दूसरी ओर, इनेलो के अन्य विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया ने भी इसी संदर्भ में उक्त एक्ट के तहत ही 25 मार्च 2019 को एक याचिका भी विधानसभा में दायर कर दी थी। बाद में दौलतपुरिया भी इनेलो छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर गए थे। दौलतपुरिया के भाजपा में जाने के बाद इनेलो विधायक अभय चौटाला ने भी 26 जुलाई 2019 एक एप्लीकेशन देकर इस याचिका को आगे बढ़ाया।
इस याचिका पर स्पीकर ने इन चारों विधायकों को चार हफ्तों में यानि 20 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। चारों विधायकों के जवाब दाखिल होने के बाद दोनों पक्षों में स्पीकर के समक्ष 27 अगस्त को जिरह भी हुई। चारों विधायकों ने इस दौरान अपनी कई दलीलें पेश की। जिनमें दो दलीलों को प्रमुखता से उठाया गया।
पहली दलील में इन विधायकों ने कहा कि इनेलो के ही एक अन्य विधायक नागेंद्र भडाना भी तो खुलेआम हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ मंच शेयर करते हैं, उनकी रैलियों में जाते हैं और उनके राजनीतिक कार्यक्रमों का हिस्सा बनते हैं। जबकि दूसरी दलील में कहा गया कि इसी तरह पूर्व सांसद मुलायम सिंह यादव ने भी 16वीं लोकसभा के अंतिम सत्र के अंतिम दिन सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी और कहा था कि वह चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से चुनकर आएं। जबकि मुलायम सिंह भी दूसरी पार्टी से ताल्लुक रखते हैं। लिहाजा मौजूदा सिस्टम में यदि कोई नेता दूसरी पार्टी के निजी व सोशल कार्यक्रमों में चला जाए, तो इसमें गलत क्या है? लिहाजा हम पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद और गलत है।
इस्तीफे का दांव भी खाली गया
इन चारों बागी विधायकों ने स्पीकर की कार्यवाही से बचने के लिए ‘इस्तीफे’ का दांव चला था। इन विधायकों ने ऐन वक्त पर 3 सितंबर को अपने इस्तीफे विधानसभा स्पीकर को सौंप दिए थे। साथ ही उन्होंने औपचारिक रूप से इनेलो छोड़ने का भी ऐलान कर दिया था। 4 सितंबर को यह इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए थे।
मगर यह इस्तीफे इस याचिका पर कोई प्रभाव नहीं डाल पाए, क्योंकि याचिका 27 मार्च 2019 से चल रही है और दूसरी शिकायत भी 26 जुलाई को आ गई थी। लिहाजा याचिका पर फैसला निश्चित था। इसके अलावा याचीकर्ता ने चारों विधायकों के खिलाफ पर्याप्त सुबूतों में उनके फोटोग्राफ, अखबारों की कतरने, सीडी इत्यादि भी उपलब्ध करवाई थी, जिसमें इन विधायकों को जजपा का समर्थन करते देखा गया।
इतना ही नहीं एक 21 फरवरी 2019 को विधानसभा सत्र के दौरान नैना चौटाला के एक बयान को भी बतौर सुबूत पेश किया गया, जिसे जजपा समर्थित बताया गया। जिसके बाद स्पीकर ने दल-बदल कानून के तहत चारों विधायकों को आयोग्य करार दे दिया है।
महंगा पड़ा गुलाम नबी के साथ मंच सांझा करना
इसी तरह एक अन्य शिकायत में इनेलो विधायक रामचंद्र कंबोज ने फिरोजपुर झिरका के इनेलो विधायक नसीम अहमद के खिलाफ भी विधानसभा स्पीकर के समक्ष याचिका लगाई थी। आरोप था कि नसीम अहमद ने बिना इनेलो छोड़े न केवल कांग्रेस नेता गुलामनबी आजाद के साथ मंच सांझा किया, बल्कि कांग्रेस भी ज्वाइन की। नसीम की गुलाम नबी आजाद के साथ फोटो भी बतौर सुबूत पेश की गई। जिसके बाद कार्रवाई करते हुए उन्हे भी आयोग्य करार दिया गया।
दो अलग-अलग शिकायतों के आधार पर पांच इनेलो विधायकों को दल बदलने पर आयोग्य घोषित कर दिया गया है। दोनों शिकायतें इनेलो नेताओं की ओर से आई थी। उन पर लंबी चर्चा की गई, दोनों पक्षों को बात रखने का मौका दिया गया। उसके कानून सम्मत कार्रवाई निर्णय दिया गया है। -कंवरपाल, स्पीकर, हरियाणा विधानसभा