चंडीगढ़। सेक्टर-38 निवासी कुलजीत सिंह मिंटू का छोटा बेटा करमवीर जब ढाई महीने का था तब एक खबर ने उन्हें परेशानी में डाल दिया। बेटे का शरीर पीला पड़ रहा था। जांच में पता चला कि उनका बेटा थैलेसीमिया से पीड़ित है। इस गंभीर बीमारी के सिर्फ दो ही इलाज हैं। पहला, जिंदगी भर हर 20 से 22वें दिन रक्त चढ़वाना और दूसरा बोन मैरो ट्रांसप्लांट। दोनों ही इलाज आसान नहीं हैं। कुलजीत सिंह ने ढाई महीने की उम्र से ही अपने बेटे को ब्लड चढ़वाना शुरू किया। इसके लिए वह पीजीआई जाते थे और थैलासीमिक चैरिटेबल ट्रस्ट की मदद से उन्हें रक्त मिलता था। सात साल की उम्र तक करमवीर को ब्लड चढ़ता रहा।
बार-बार ब्लड चढ़ाने से मरीज को कई तकलीफों से गुजरना पड़ता है। करमवीर को भी कई सारी परेशानियां झेलनी पड़ती थीं, जिन्हें देख पाना कुलजीत सिंह के लिए आसान नहीं था। फिर उन्होंने बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाने का फैसला लिया। इसके लिए उन्होंने छानबीन शुरू की और पता चला कि लुधियाना स्थित दयानंद मेडिकल कालेज (डीएमसी) में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के रिजल्ट बेहतर है। उसके बाद उन्होंने बोन मैरो की तलाश शुरू की। अच्छी बात रही कि उनके बड़े बेटे मनसाहिब सिंह का बोन मैरो करमवीर से मैच हो गया। दो दिसंबर 2013 को करमवीर का बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरा हो गया और उसे नया जीवन मिला। उसके बाद से कुलजीत सिंह ने फैसला कर लिया कि जिस तरह से उनके बेटे को ब्लड मिलता रहा है, अब वह दूसरे बच्चों की मदद के लिए हर साल रक्तदान कैंप का आयोजन करेंगे। 2013 से कुलजीत सिंह हर साल रक्तदान का कैंप लगा रहे हैं।
बुधवार को दो दिसंबर था इसलिए सेक्टर-38 के गुरुद्वारे में रक्तदान कैंप का आयोजन किया गया। कैंप में 123 लोगों ने रक्तदान किया। कुलजीत कहते हैं कि कैंप का आयोजन वह ऊपर वाले का शुक्राना अदा करने के लिए करते हैं। उसी की कृपा से बेटे को नया जीवन मिला है। इस मौके पर मनप्रीत कौर, जसपाल सिंह, हरजिंदर कौर मौजूद रहीं। गुरनाज कौर ने सभी रक्तदानियों को सम्मानित किया।
क्या होता है थैलेसीमिया
थैलेसीमिया एक ऐसा रोग है, जो आमतौर पर जन्म से ही बच्चे को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। यह दो प्रकार का होता है। माइनस और मेजर। जिन बच्चों में माइनर थैलेसीमिया होता है, वे लगभग स्वस्थ जीवन जी लेते हैं, जबकि जिन बच्चों में मेजर थैलेसीमिया होता है, उन्हें लगभग हर 21 दिन बाद या महीने भर के अंदर एक शीशी खून चढ़ाना पड़ता है। इससे पीड़ित बच्चे के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन सही तरीके से नहीं हो पाता है और इन कोशिकाओं की आयु भी बहुत कम हो जाती है।
थैलेसीमिया से बचने के उपाय
शादी करने से पहले लड़का-लड़की को ब्लड चेकअप करवा लेना चाहिए
नजदीकी रिश्ते में शादी-विवाह करने से परहेज रखना चाहिए
गर्भधारण के चार महीने के अंदर भ्रूण का परीक्षण कराना चाहिए
भ्रूण में थैलेसीमिया के लक्षण पाते ही डॉक्टर गर्भपात करवाने की सलाह देते हैं