फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दूसरों की जान बचा लौट रहे फायर कर्मी खुद बाल-बाल बचे

Sun, 24 May 2015 03:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
विज्ञापन
विज्ञापन
ट्रक चालक की लापरवाही से गांव माणक्यां के पास फायर ब्रिगेड की गाड़ी करीब 20 फुट नीचे गड्ढे में जा गिरी। कालका फायर ब्रिगेड की इस गाड़ी में चार फायरकर्मी भी सवार थे, जिन्हें चोटें आई हैं।
विज्ञापन


जानकारी मिलते ही पुलिस पीसीआर ने सभी घायलों को सेक्टर छह के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। फायर स्टेशन ऑफिसर की शिकायत पर रामगढ़ चौकी में अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन की जा रही है।

लीडिंग फायर ऑफिसर सुरिंदर सिंह ने बताया कि रात करीब दो बजे बरवाला में लगी आग बुझाकर लौट रहे थे। फन सिटी से थोड़ी दूर पहले माणक्यां के पास पंचकूला की तरफ से आते हुए ट्रक चालक का संतुलन बिगड़ गया। इस दौरान दोनों वाहनों में आमने-सामने की टक्कर होने से चंद सेकेंड पहले ट्रक चालक ने स्टीयरिंग मोड़ लिया।
विज्ञापन


फायर ब्रिगेड की गाड़ी चला रहे चांद सिंह ने भी सतर्कता बरती, लेकिन ट्रक के पिछले हिस्से में बाहर निकले पार्ट्स से हुई टक्कर के बाद उसका भी संतुलन बिगड़ गया। लीडिंग फायर ऑफिसर ने बताया कि घटना के वक्त गाड़ी में पानी भी था, जिस कारण गाड़ी नियंत्रित नहीं हुई और गड्ढे में जा गिरी।

गड्ढे में चारों तरफ झाड़ियां और अंधेरे के बीच काफी मशक्कत के बाद चारों कर्मी सड़क तक पहुंचे। सुरिंदर सिंह ने बताया कि उनके साथ तीन अन्य फायरमैन चांद सिंह, अशोक और कुलदीप को चोटें आई हैं। प्रत्यक्षदर्शी फायरकर्मी के मुताबिक, ऐसा लगा कि ड्राइवर को झपकी आ रही थी।

घटना में फायर ब्रिगेड की गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के करीब 10 घंटे बाद तक भी गाड़ी को गड्ढे से नहीं निकाला गया था।

मामले में अज्ञात ट्रक ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया गया है। नुकसान का आंकलन नहीं हो सका है।
-एसएस मलिक, फायर स्टेशन ऑफिसर, पंचकूला।

दूसरों की जान बचाने वालों का नहीं जीवन बीमा
अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाने वाले फायरकर्मी खुद असुरक्षित हैं। पिछले वर्ष नगर निगम की जनरल हाउस मीटिंग में डिप्टी मेयर सुनील तलवार ने फायरकर्मियों के जीवन बीमा का मुद्दा उठाया था, लेकिन अब तक इस दिशा में किसी ने पहल नहीं की।

2011 में आग बुझाते हुए जख्मी हुए एक कर्मी ने कहा था कि हर रोज उन्हें अपने परिवार के भविष्य की चिंता सताती है। सरकार को इस दिशा में जरूर सोचना चाहिए। माणक्यां के पास हुई दुर्घटना में चोटिल फायरकर्मियों की जुबां पर बस यही बात थी कि उन्हें कुछ हो जाता तो परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी कौन लेता।
विज्ञापन


डिप्टी मेयर सुनील तलवार ने कहा कि फायरकर्मियों के बीमा के लिए हाउस मीटिंग में सहमति बन चुकी थी। जल्द इसे लागू करने के लिए दोबारा प्रयास किए जाएंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें