लाखों रुपये की लागत से फायर विभाग द्वारा खरीदी गई दर्जन भर गाड़ियां कई महीनों से नगर निगम के स्टोर में धूल खा रही हैं। काफी समय से स्टोर में खड़ी रहने से गाड़ियों की मशीनरी भी खराब हो रही है।
जबकि, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि गाड़ियों में अधूरा काम जल्दी ही पूरा करवाया जाएगा। इसके लिए एक टीम गठित कर दी गई है। इसके बाद गाड़ियों को विभिन्न जिलों में भेज दिया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, इन गाड़ियों की खरीद के लिए केंद्र सरकार से ग्रांट आनी थी। जबकि उस ग्रांट में 60 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार ने डालना था। लेकिन, किसी कारण से केंद्र की ग्रांट नहीं आई। जबकि पंजाब सरकार की ग्रांट रिलीज हो गई।
अप्रैल 2012 में गाड़ियां खरीदने के लिए सरकार की तरफ से रकम जमा करवा दी गई। 2013 में गाड़ियों की चैसी आ गई। लेकिन पैसे की कमी के चलते गाड़ियों में फायर फाइटिंग से संबंधित सामान लगाने का काम अधूरा ही रह गया।
इसी बीच एक बार स्थानीय निकाय मंत्री ने गाड़ियों को विभिन्न नगर काउंसिलों व नगर निगमों को भेजने के आदेश दे दिए। साथ ही कि उक्त संस्थाओं को अधूरा काम पूरा करवाकर प्रयोग करने की हिदायत दी।
लेकिन इसी बीच शहर के फायर अधिकारी ने दलील दी कि ऐसी स्थिति में गाड़ियां भेजने से इनका सही प्रयोग नहीं होगा। इसके बाद नगर निगमों व नगर काउंसिलों से आठ-आठ लाख रुपये मांगे गए।
लेकिन किसी ने भी बनती रकम जमा नहीं करवाई। इसी बीच विभाग के मंत्री ने मोहाली नगर निगम को पत्र लिखकर हिदायत दी गाड़ियों को तैयार करवाया जाए।
लेकिन मोहाली नगर निगम ने फंड की कमी संबंधी अधिकारी को पत्र लिखा। इसके बाद फिर मंत्री ने फिर मोहाली नगर निगम को गाड़िया तैयार करने की हिदायतें जारी की है।
नगर निगम के कमिश्नर उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि गाड़ियां डॉयरेक्ट्रोरेट की हैं। इन्हें विभिन्न जिलों में भेजा जाना है। इनका काम पूरा करवाने के लिए एसई की अगुवाई में कमेटी गठित की गई है।