चंडीगढ़। सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज और सेक्टर-36 स्थित एमसीएम डीएवी कॉलेज शिक्षक संघ ने एडेड शिक्षकों के लिए यूजीसी 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को लागू नहीं करने और एरियर जारी नहीं करने के खिलाफ प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने कहा कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर कई बार अनुरोध किया है और प्रिंसिपल को पत्र लिखा है। लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि एडेड कॉलेजों में विद्यार्थियों की फीस 12.5 प्रतिशत बढ़ा दी गई है और शिक्षकों को तनख्वाह के लिए धरने देने पर मजबूर किया जा रहा है। शिक्षकों ने कहा कि स्ववित्तपोषित और सहायता प्राप्त शिक्षण पदों पर एक ही संस्था के कर्मचारी समान योग्यता और पेशेवर कौशल रखते हैं। वे एक ही प्रबंधन के साथ काम करते हैं। इसलिए प्रबंधन की ओर से यह भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण अस्वीकार्य है। कॉलेजों का शैक्षणिक वातावरण कर्मचारियों की मानसिक पीड़ा को बढ़ाएगा। शिक्षकों ने अधिकारियों के संवेदनहीन और उदासीन रवैये की निंदा की। क्योंकि डीएवी और एमसीएम डीएवी दोनों कॉलेजों के प्रिंसिपल उनकी पीड़ा सुनने के लिए अपने कार्यालयों में मौजूद नहीं थे। वहीं धरने पर बैठे शिक्षकों के परिसर में बिजली बंद करवा दी गई। दोनों कॉलेजों के नाराज शैक्षणिक कर्मचारियों ने संशोधित वेतनमान नहीं मिलने या कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलने तक विरोध प्रदर्शन के अलाका अधिकारियों के साथ असहयोग का रुख जारी रखने का फैसला किया है।
महिला प्रोफेसर मौत मामले में कार्रवाई की मांग
पीयू स्टूडेंट सेंटर पर पंजाब सरकार की ओर से शैक्षणिक अदारों की दयनीय हालात करने और शिक्षकों के साथ हो रहे अन्याय को लेकर प्रदर्शन किया। पिछले दिनों रोपड़ में एक महिला प्रोफेसर ने कथित तौर पर आत्महत्या की थी। महिला सहायक प्रोफेसर ने सरहिंद नहर में छलांग लगाई थी। महिला की पहचान रूपनगर निवासी डॉ. बलविंदर कौर के रूप में हुई थी। बलविंदर कौर 483 सदस्यों में से एक हैं, जिन्होंने 1158 सहायक प्रोफेसर और लाइब्रेरियन फ्रंट के बैनर तले राज्य के शिक्षामंत्री हरजोत बैंस के गांव गंभीरपुर में धरना दिया था। यह धरना पिछले दो माह से जारी है। महिला के कथित सुसाइड नोट पर शिक्षा मंत्री को आत्महत्या का जिम्मेवार ठहराया है। इसको लेकर पीयू सेंटर पर सभी छात्र संगठनों ने सामूहिक प्रदर्शन किया और पंजाब सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की।