-सजा पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका को हाईकोर्ट ने किया खारिज
-7 जून 2023 को कैथल की अदालत ने माना था दोषी, किया गया था बर्खास्त
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिए गए तीन बच्चों के पिता जेल वार्डन के आचरण को पुलिस अधिकारी के तौर पर अनुचित मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिका दाखिल करते हुए जेल वार्डन पद से बर्खास्त बलजीत सिंह ने हाईकोर्ट से कैथल की अदालत द्वारा दुष्कर्म के मामले में दोषी करार देने और 10 साल की सजा पर रोक की मांग की थी। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि सजा के खिलाफ उसकी अपील विचाराधीन है और हाईकोर्ट उसकी सजा को निलंबित कर चुका है। याची की अपील पर हाईकोर्ट का फैसला आने में समय लग सकता है। याची को 7 जून 2023 को दोषी करार देने के बाद 14 जून को डीजीपी जेल ने उसे बर्खास्त कर दिया है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि उसकी सजा पर रोक लगाई जाए ताकि वह अपनी सेवा जारी रख सके। हाईकोर्ट ने कहा कि याची शादीशुदा व्यक्ति है और उसके तीन बच्चे हैं, पुलिस अधिकारी के तौर पर उससे इस तरह के आचरण की अपेक्षा नहीं की जाती। याची पर गंभीर आरोप हैं और उसे पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। ऐसे में याची की सजा पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं बचता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से इन्कार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।