चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा धारक की विदेश में हुई मौत के बाद शव को वापस लाने में खर्च 6562 अमेरिकन डॉलर की रकम बीमा कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने सेवा में कोताही की दोषी न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को खर्च हुए 6562 अमेरिकन डॉलर नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार और मुकदमा खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये का भुगतान करने के लिए भी कहा है।
बीमा कंपनी ने कहा कि बीमा धारक की तरफ से पॉलिसी लेते समय भौतिक तथ्यों का खुलासा न करने की वजह से शिकायतकर्ता के दावे को अस्वीकार किया गया था। हरिंदर बीर सिंह को मधुमेह था, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव प्रपत्र में यह तथ्य छुपाया। बीमाधारक का पहले हाइपरग्लेसेमिया और मधुमेह का इलाज भी करवाया था।
क्या है मामला..मोहाली फेज-3 की रहने वाली उपिंद्र कौर ने बताया कि उनके पिता हरिंदर बीर सिंह ने बीमा कंपनी से मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी (व्यवसाय और छुट्टियां) ली थी, जो कि 9 सितंबर 2018 से 6 अक्तूबर 2018 तक के लिए वैध थी। याचिका के मुताबिक बीमा धारक और उनकी पत्नी 9 सितंबर से 4 अक्तूबर 2018 तक यूएसए गए थे। 30 सितंबर 2018 को हरिंदर बीर सिंह को यूएसए में कार्डियक अरेस्ट हुआ और वहां उनकी मौत हो गई। विदेश में पिता की हुई मौत के बाद उनके शव को कैलिफोर्निया से चंडीगढ़ लाकर अंतिम संस्कार किया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि पिता के शव को कैलिफोर्निया से नई दिल्ली वापस लाने के दौरान हवाई टिकट, वीजा, पोस्टमार्टम और अन्य शुल्क के तौर पर कुल 6562 अमेरिकन डालर खर्च हुए थे। पिता की ओर से ली गई पॉलिसी में नामांकित (नॉमिनी) होने के चलते शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी से मेडिक्लेम की मांग के लिए दावा दायर किया लेकिन कंपनी ने फरवरी 2020 में शिकायतकर्ता का दावा खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी के खिलाफ आयोग में याचिका दायर की थी।