इस बार मध्यप्रदेश ने गेहूं उत्पादन में यूपी और पंजाब को पीछे छोड़ दिया है। इसके पीछे पंजाब के किसानों को ही बड़ा कारण माना जा रहा है। तीन साल पहले बड़ी संख्या में पंजाब के किसानों ने मध्य प्रदेश में जमीन खरीदकर गेहूं की खेती शुरू की थी। इस साल पिछले साल की तुलना में इसमें 60 फीसदी बढ़ोतरी हुई। सरकारी खरीद अच्छी, तेज भुगतान और उपजाऊ जमीन के कारण पंजाब का किसान मध्य प्रदेश गया और गेहूं उत्पादन में मध्य प्रदेश को पंजाब के बराबर ला दिया। हालांकि नए कानून से वहां गए किसान भी काफी परेशान हैं।
मध्य प्रदेश में 10 लाख किसान हर साल सरकार को गेहूं बेचते हैं, लेकिन इस साल यह संख्या 60 प्रतिशत बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड एक करोड़ 27 लाख 67 हजार 628 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। पंजाब में एक करोड़ 27 लाख 67 हजार 473 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। इस साल केंद्र सरकार द्वारा खरीदे गए कुल 386.54 लाख मीट्रिक टन गेहूं में 33 फीसदी हिस्सेदारी अकेले मध्य प्रदेश की रही, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।
मध्य प्रदेश में 172.52 हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है जो पंजाब से 4 गुना ज्यादा है। हालांकि पंजाब में एक हेक्टेयर जमीन में 5 टन (50 क्विंटल) गेहूं होता है जबकि मध्य प्रदेश में इतने ही क्षेत्रफल में 3 टन (30 क्विंटल) गेहूं पैदा होता है। दरअसल, मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद काफी अच्छी है। किसानों को भुगतान काफी जल्दी किया जाता है।
सी बात से प्रभावित होकर पंजाब व हरियाणा से आए किसानों ने मध्य प्रदेश में जमीनें खरीदी। मध्य प्रदेश की शरबती काली मिट्टी में बिना रासायनिक उर्वरक के गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। जबकि पंजाब में उर्वरक का बहुत उपयोग होता है। मध्यप्रदेश का गेहूं इतना बेहतर है कि पंजाब में चक्कियों पर वहां का आटा स्पेशल बिकता है। वहां के नर्मदा इलाके के आटे की खासी डिमांड है, क्योंकि वहां गेहूं बिना उर्वरक के पैदा की जाती है।
मध्य प्रदेश में जमीन खरीदकर खेती करने वाले शाहकोट के किसान तजिंदर सिंह का कहना है कि वहां पर सरकारी खरीद काफी अच्छी है, लेकिन अब नए कानून बनने से पंजाब के किसानों को अधिक नुकसान होगा। हमारी तरफ से गेहूं की पैदावार कर मध्य प्रदेश को ऊंचाई पर खड़ा कर दिया गया क्योंकि हमारी फसल की खरीद सुरक्षित थी। हमें पता था कि मंडी में आते ही हमारी फसल सरकार खरीद लेगी। मध्य प्रदेश में हमें खासा रिस्पांस मिल रहा था लेकिन नए कानून से असमंजस की स्थिति है।