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सबसे बड़ा मुद्दा: मौसम की मार के आगे किसान लाचार, पर्याप्त मुआवजा न मिलने से हो रहे हताश, सरकार का अलग ही दावा

Mon, 01 Apr 2024 02:51 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए किसानों के पास कोई पुख्ता इंतजाम न होने के कारण नुकसान उठाने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है। ऐसे में किसान सिर्फ सरकार की तरफ से दिए जाने वाले मुआवजे पर ही निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें नुकसान का पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता, जबकि सरकार का दावा है कि किसानों को पूर्व सरकारों की तुलना में अधिक मुआवजा दिया जा रहा है।
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मौसम की मार से किसान बेहाल - फोटो : फाइल
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विस्तार
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किसान साल भर खेत में जी तोड़ मेहनत करते हैं, लेकिन मौसम की मार के आगे वह लाचार हो जाते हैं। कभी सूखा, तो कभी बाढ़, कभी बेमौसमी बारिश, तो कभी ओलावृष्टि... हर साल इससे किसानों को करोड़ों का नुकसान होता है। 
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वर्ष 2023 में जुलाई महीने में आई बाढ़ के कारण करीब 6.25 लाख एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह से पानी में डूब गई थी, जिससे किसानों को करीब 1300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। वर्ष 2023 में जुलाई व अगस्त माह के दौरान किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। प्रमुख रूप से पटियाला, संगरूर, मोहाली, रूपनगर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब आदि जिलों में सर्वाधिक नुकसान हुआ था। पंजाब के 18 जिले बाढ़ के से प्रभावित हुए थे।

जनवरी व फरवरी 2024 में हुई ओलावृष्टि से भी किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। पंजाब में 34 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर गेहूं की बुआई की गई थी और लाखों एकड़ में फसल नष्ट हो गई थी। मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और लुधियाना समेत अन्य जिले इससे अधिक प्रभावित हुए। इस दौरान सब्जियों और सरसों की फसल का अधिक नुकसान हुआ, क्योंकि इन फसलों के पौधे नाजुक होते हैं और ओलावृष्टि का इन पर अधिक प्रभावित पड़ता है। प्रदेश में करीब 50 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर सब्जियां और सरसों उगाई थीं। इसके अतिरिक्त आलू की फसल इससे भी अधिक थी, जिसके चलते ये सभी फसलें खराब हो गई थी।
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मुआवजे में 3000 रुपये प्रति एकड़ की वृद्धि
2023 में भारी बारिश और ओलावृष्टि के कारण पंजाब में 90,368 एकड़ जमीन पर गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। बठिंडा जिले में सर्वाधिक 44,442 एकड़ में खड़ी फसल ओलावृष्टि और बारिश के चलते खराब हो गई। सभी जिलों में 40 करोड़ रुपये की राशि पहले ही जारी की गई। मुआवजा राशि में बीते वर्ष सरकार ने 3000 रुपए प्रति एकड़ की वृद्धि की थी। पहले जहां पर 75 फीसदी से ज्यादा का नुकसान होता था, वहां पर 12 हजार रुपए प्रति एकड़ दिया जाता था, जिसे बढ़ाकर 15 हजार कर दिया गया है।

क्या कहते हैं किसान...
अभी तक नहीं मिला गेहूं के नुकसान का मुआवजा

किसान नेता तेजवीर सिंह ने कहा कि पहले बाढ़ और फिर ओलावृष्टि और अब आंधी के कारण भी फसलों का काफी नुकसान हुआ है। खासकर गेहूं की फसल इससे अधिक प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार मुआवजा देने का तो दावा कर रही है, लेकिन ये सभी किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। पिछले साल बाढ़ का मुआवजा ही अभी तक अधिकतर किसानों को नहीं मिल पाया है, जबकि सरकार ने मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू जरूर की थी।

सिर्फ सर्वे हुआ, मुआवजा नहीं मिला
किसान नेता जरनैल सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की तरफ से सर्वे तो करवाया जाता है, लेकिन मुआवजा अधिकतर किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नियमित रूप से फसलों के नुकसान पर सरकार को गिरदावरी करवानी चाहिए और मुआवजा राशि जारी की जानी चाहिए। तब जाकर किसान नुकसान से उबर पाएंगे। उन्होंने मांग की है कि मुआवजा राशि को बढ़ाया जाए। अब तक सरकार ने मुआवजा राशि जारी करने का जो दावा किया है, वह सभी किसानों तक पहुंच नहीं पाया है। किसान अभी पिछले मुआवजे के इंतजार में हैं, जबकि ओलावृष्टि और तेज आंधी के कारण फसल नष्ट होने के चलते किसानों पर दोबारा मार पड़ी है।

सरकार का तर्क...
करवाई जा रही विशेष गिरदावरी

सरकार इस साल ओलावृष्टि के कारण फसलों के हुए नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा जारी करेगी। इस प्रक्रिया के लिए सरकार की तरफ से 31 मार्च तक विशेष गिरदावरी का काम पूरा किया जा रहा है। इसमें नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके बाद किसानों को मुआवजा राशि जारी की जाएगी। सरकार ने 24 जुलाई 2023 को बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान की सभी डिप्टी कमिश्नर को आदेश जारी कर विशेष गिरदावरी कराई थी। इस विशेष गिरदावरी की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा पटियाला, कपूरथला, फिरोजपुर, संगरूर और तरनतारन जिले के किसान प्रभावित हुए थे। यही कारण है कि गिरदावरी के बाद ही 53500 किसानों को 256.29 करोड़ मुआजवा राशि जारी की गई है। सरकार ने पांच एकड़ तक के किसान को प्रति एकड़ 6800 रुपये के हिसाब से मुआवजा जारी किया था।

तुरंत गिरदावरी करवाई जाए: मजीठिया
शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि तेज आंधी व बारिश का कहर अन्नदाता पर जमकर टूटा है। इस कारण फसलों का भारी नुक्सान हुआ है। अभी तक किसानों को पहले खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिल पाया है और अब उलटा उन पर दोबारा ये मार पड़ी है। अन्नदाता को राहत देने के लिए तुरंत गिरदावरी करवाई जानी चाहिए और किसानों को राहत दी जानी चाहिए।

किसानों को दिया जाए अधिक मुआवजा: वड़िंग
पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि बारिश के साथ ही तेज हवाएं चलने के कारण किसानों का काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल अधिकतर जिलों में पूरी तरह से नष्ट हो गई है। हर बार ही किसानों पर ये मार पड़ती है। किसानों को अधिक मुआवजा दिया जाना चाहिए। पिछले साल बाढ़ के कारण पहले ही किसान घाटा झेल रहे हैं और अब उनकी पक्की फसल का नुकसान हुआ है, जिससे साफ है कि इस बार गेहूं की फसल कम होगी। सरकार से अपील की है कि वह किसानों का साथ दें।

किसानों को झेलनी पड़ रही दोहरी मार: सुखबीर
शिरोमणि अकाल दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पहले ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसल खराब हुई थी और अब आंधी व बारिश के चलते भी फसल खराब हुई है। खासकर मालवा क्षेत्र में गेहूं की खड़ी फसल का अधिक नुकसान हुआ है। सरकार तुरंत गिरदावरी करवाए और किसानों को जल्दी मुआवजा राशि जारी की चाहिए।

प्राकृतिक आपदा से होने वाले फसली नुकसान को लेकर सरकार हर साल नियमित और विशेष रूप से गिरदावरी कराती है। 31 मार्च तक प्रदेश के सभी डिप्टी कमिश्नरों को आदेश जारी कर विशेष गिरदावरी कर किसानों को मुजावजा राशि जारी की जाएगी। काफी हद तक इसकी प्रक्रिया पूरी भी कर ली गई है। -ब्रह्म शंकर जिंपा, राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री, पंजाब।

आपदा प्रबंध फंड के क्या हैं नियम
कुल मुआवजा राशि का 75 फीसदी राज्य सरकार अदा करती है, जबकि बाकी 25 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती है। आपदा प्रबंध फंड से 75 प्रतिशत से ज्यादा फसल का नुकसान होने पर 6800 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाता है, जिसमें से 75 फीसदी के हिसाब से 5100 रुपये केंद्र और 1700 रुपये राज्य सरकार देती है, लेकिन पूर्व सरकारों ने मुआवजा 12 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। 5100 केंद्र का और शेष 6900 रुपये की राशि राज्य सरकार अदा करती है। अब राज्य का हिस्सा 9900 हो गया है और केंद्र का हिस्सा 5100 रुपये है।

पंजाब में फायदेमंद साबित नहीं हो पाई फसल बीमा योजना
अभी तक पंजाब के किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलता रहा है, क्योंकि किसान इसकी शर्तों से सहमत नहीं थे। पंजाब सरकार भी इसे लागू करने से कतराती रही, लेकिन अब भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में अब पंजाब के किसानों को भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ प्राप्त होगा। पंजाब ने कृषि और संबंधित क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की फसल का बीमा किया जाता है। फसल बीमा योजना हर राज्य में एक समान नहीं होती हैं। हर राज्य के नियम कानून अलग होते हैं। योजना के संचालन का तरीका भी अलग होता हैं। वर्ष 2023 में पंजाब में खरीफ में उगाई जाने वाली प्रमुख धान व कपास की फसलों को इसका लाभ मिलेगा।
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