चावल हो या फिर फूड ग्रेन। इनकी पैकेजिंग का हर समाधान मिलता है पंचकूला में। ये समाधान उपलब्ध करवाने वाले हैं एमएस पैकेजिंग के प्रोप्राइटर संजीव मोंगा। वर्ष 1986 में आतंकवाद के कारण किसान परिवार ने पंजाब छोड़ा।
एक बैग लेकर पंजाब से चंडीगढ़ आए संजीव मोंगा की कंपनी रोजाना चावल, फूड ग्रेन, वीट, सल्फर और डीएपी निर्यात के लिए कई हजार बैग्स बनाकर एक्सपोर्ट कर रही है।
पैसों से ज्यादा लाइफस्टाइल को अहमियत देने वाले संजीव मोंगा ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा ही नहीं था कि वे बिजनेस के क्षेत्र में आएंगे, लेकिन बड़े भाई से मिली प्रेरणा और खुद की मेहनत के दम पर वे इस मुकाम पर हैं।
आतंकवाद की वजह से छोड़ा शहर
संजीव मोंगा ने बताया कि चंडीगढ़ पंजाब विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने बैग्स बनाने वाली एक फैक्ट्री में 700 रूपये प्रतिमाह नौकरी की। उन्होंने बताया कि आतंकवाद की वजह से पंजाब में हालात ठीक न होने के कारण परिवार के सदस्य दिल्ली शिफ्ट हो गए।
वहां पर उनके बड़े भाई अनिल, छोटे भाई राजेश मोंगा और खुद उन्होंने एमसन इंटरनेशनल कंपनी की शुरुआत की। संजीव मोंगा ने बताया कि दिल्ली का लाइफस्टाइल पंसद न आने की वजह से वे एक साल बाद चंडीगढ़ आ गए।
चंडीगढ़ आकर शुरू किया बैग्स पैकेजिंग का काम
संजीव मोंगा ने बताया कि वर्ष 1992 में दिल्ली से चंडीगढ़ आने के बाद उन्होंने छोटी सी पूंजी और दो-तीन कर्मचारियों के साथ चावल निर्यात के लिए बैग्स बनाने और पैकेजिंग का काम शुरू किया।
संजीव मोंगा ने बताया कि जूट के बैग महंगे और उत्पादन पश्चिम बंगाल से होने की वजह से उन्होंने जूट के बैग्स को इनकी जगह रिप्लेस किया। शुरुआत में वे एक्सपोर्टर को ही ये बैग्स मुहैया करवाते थे। बाद में फूड ग्रेन, वीट, सल्फर, डीएपी आदि के लिए भी बैग्स बनाने शुरू किए। उन्होंने बताया कि पंजाब व अन्य जगहों से इन बैग्स की मांग इतनी थी कि वे बाहर से भी जॉब वर्क करवाते थे और एक दिन में करीब 20 हजार बैग्स बनाते थे।
एक्सपोर्ट कम होने पर पंचकूला आए
संजीव मोंगा ने बताया कि एक्सपोर्ट का काम कम होने की वजह से वर्ष 2014 में वे पंचकूला आ गए और एमसन पैकेजिंग के नाम से फैक्ट्री लगाकर जर्मन मेड मशीनों के साथ ये ही बैग्स और पैकेजिंग का काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि वे इंडस्ट्रियल उद्देश्य के लिए हाइ डेन्सिटी पॉली एथलीन/ पॉलीप्रोपाइलीन बैग्स बनाने लगे। अब उनकी इंडस्ट्री में एचडीपीई/पीपी बैग्स के साथ साथ नॉन वूवा बैग्स भी तैयार होते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी फैक्ट्री में तैयार इन बैग्स की डिमांड पंजाब, हरियाणा और हिमाचल सहित अन्य कई जगहों में है।
प्रिंटिंग के लिए बड़ी मशीने लगाने पर विचार
संजीव मोंगा ने बताया कि वे इसी क्षेत्र में बैग्स बनाने के साथ साथ प्रिंटिंग के लिए आधुनिक मशाने लगाने पर विचार कर रहे हैं। जिससे न केवल उनके उत्पाद की क्वालिटी बढ़ेगी बल्कि उनके बिजनेस को भी फायदा होगा। उन्होंने बताया कि एक्सपोर्ट खुलने पर वे आगे चलकर इसी क्षेत्र में अन्य चीजों पर भी काम करने की सोच रहे हैं।
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इन जगहों से है डिमांड
पंजाब, हरियाणा और हिमाचल
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ये करते हैं तैयार
- एचडीपीई/पीपी बैग्स
- नॉन वूवा बैग्स
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रोजगार- करीब 15 कर्मचारी
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प्रोफाइल
कंपनी- एमसन पैकेजिंग
संजीव मोंगा, प्रोपराइटर
स्कूलिंग- एसडी हायर सेकेंडरी स्कूल, फिरोजपुर (1982)
ग्रेजुएशन- आरएसडी कॉलेज, फिरोजपुर (1985)
पोस्ट ग्रेजुएशन- पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस, चंडीगढ़ (1988)
कोषाध्यक्ष- पंचकूला इंडस्ट्री एसोसिएशन, पंचकूला
सदस्य- जिमखाना क्लब, पंचकूला
सदस्य, चंडीगढ़ क्लब, चंडीगढ़
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नए लोगों के लिए सुझाव
- बुनियादी ज्ञान का होना बेहद जरूरी
- अनुभवी लोगों से सुझाव जरूर लें
- आत्मविश्वास का होना भी जरूरी
- पैसों की अहमियत को जरूर समझें
- आगे बढ़ने के लिए शॉर्ट कट तरीके न अपनाएं
- मेहनत और लगन के साथ काम करें