-हाईकोर्ट ने पूछा पांच साल में कितनी एफआईआर दर्ज, कितने मामलों में डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
-एफआईआर का विवरण, हिरासत की अवधि व केस की अंतिम तारीख की मांगी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में डीएनए रिपोर्ट आने में असामान्य देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदाबाद पुलिस को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने अब पुलिस आयुक्त से पूछा है कि पिछले पांच साल में कितने मामले ऐसे हैं जिनमें डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है, उनकी एफआईआर विवरण, हिरासत की अवधि व केस की अंतिम तारीख क्या थी। हाईकोर्ट ने उन्हें निजी हलफनामा देकर यह जानकारी सौंपने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए इस मामले में आरोपी ने डीएनए रिपोर्ट जल्द से जल्द ट्रायल कोर्ट में पेश करने का पुलिस को निर्देश देने की मांग की थी। याची ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के गुप्तांग से व याची के रक्त के नमूने 2022 में लिए थे। इन नमूनों को जांच के लिए एफएसएल भेजा गया था। जांच एजेंसी ने जांच पूरी होने के बाद सीआरपीसी की धारा 173 के तहत अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है। लेकिन आज तक डीएनए प्रोफाइलिंग के संबंध में फॉरेंसिक रिपोर्ट जांच एजेंसी द्वारा संबंधित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई है। जांच एजेंसी के इस रवैए के कारण केस लटकता जा रहा है जो याची के संवैधानिक अधिकार का हनन है। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार व फरीदाबाद के पुलिस आयुक्त नोटिस जारी कर आयुक्त को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। इस तरह के एक मामले की सुनवाई के दौरान पिछले महीने डीएनए नमूने एकत्र करने में पुलिस के सुस्त रवैये पर चिंता जताते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के डीजीपी को निर्देश दिया था कि सीआरपीसी की धारा 53 ए का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित कर अनुपालन पर हलफनामा प्रस्तुत करें। धारा 53 ए सीआरपीसी दुष्कर्म करने के आरोपी व्यक्ति की चिकित्सा जांच से संबंधित है।