ट्राइसिटी में प्रस्तावित मेट्रो प्रोजेक्ट का अभी कहीं अता पता नहीं है, लेकिन किसी ने चंडीगढ़ मेट्रो नाम से वेबसाइट बना दी है। इतना ही नहीं वह इस साइट से विज्ञापन के जरिए कमाई भी कर रहा है।
यूटी के आला अधिकारी इस बात से अनिभिज्ञ हैं कि यह साइट किसने बनाई है। मामला ध्यान में लाने पर अब चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सैल को शिकायत देने की तैयारी चल रही है।
ऐसी है साइट
chandigarhmetro.com नाम से बनी इस साइट पर मेट्रो के रूट, किराए और स्टेशनों की जानकारी है। हालांकि कई जानकारियां गलत भी दी गई हैं।
साइट पर मटका चौक का फोटो दिखता है। साथ ही एक अन्य फोटोग्राफ भी है, जिसमें डीएमआरसी के अधिकारी प्रशासक शिवराज पाटिल को मेट्रो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंप रहे हैं।
प्रोजेक्ट का हाल
मेट्रो प्रोजेक्ट के एमओयू को लेकर बैठकें तीन बार स्थगित हो चुकी हैं। इस बैठक में चंडीगढ़ के साथ पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों को भी हिस्सा लेना है।
ऐसे में मेट्रो के प्रोजेक्ट के एमओयू पर हस्ताक्षर होने में देरी हो रही है। एमओयू पर हस्ताक्षर होंने के बाद ही इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी का गठन होगा। पंजाब और हरियाणा की मांग पर प्रशासन ने एमओयू की कुछ शर्तों में बदलाव कर एमओयू के ड्रॉफ्ट को नवंबर में मंजूरी के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को भेजा था।
मंत्रालय ने मंजूरी देने से पहले प्रशासन और पंजाब व हरियाणा के अधिकारियों की बैठक दिसंबर में बुलाई थी। लेकिन, इसके बाद अब तक यह बैठक नहीं हो सकी।
कोट
मेट्रो के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाए जाने की जानकारी मुझे मिली है। यह एक साइबर क्राइम है। इसकी शिकायत चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सैल से की जाएगी।
-एमएम सभरवाल, संयुक्त गृह सचिव, चंडीगढ़