सेक्टर -22 स्थित नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) के दफ्तर के बाहर हेल्थ वर्कर पिछले चार दिन से हड़ताल पर है।
हड़ताल लगातार बढ़ने से अब सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। टीबी मरीजों को दिक्कते आने लगी हैं। प्रेग्नेंट महिलाओं की जांच भी हिचकोले खाने लगी है।
हेल्थ अफसरों का इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है। हेल्थ वर्करों का कहना है कि मांगे पूरी नहीं होने तक वे अपनी हड़ताल वापस नहीं लेंगे। यदि प्रशासन नहीं झुकता है तो वे दूसरा रास्ता अपनाएंगे।
इसके लिए जिम्मेदारी चंडीगढ़ प्रशासन और एनआरएचएम की होगी। ये सभी कर्मचारी इंप्लाइज वर्किंग अंडर दी कंट्रोल ऑफ डीएचएस चंडीगढ़ वर्कर्स यूनियन के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे हैं।
ये सभी हेल्थ वर्कर कांट्रैक्ट के आधार पर रखे गए थे। फिलहाल इनकी नियुक्ति डिस्पेंसरी, डॉट सेंटर और अन्य विभागों में है। बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ में आधे से ज्यादा हेल्थ वर्कर कांट्रैक्ट के आधार पर रखे गए हैं।
इनकी संख्या 500 से ऊपर है। ये सभी डिस्पेंसिरयों में कार्यरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने मांग पत्र पिछले कई महीनों से दे रहे हैं, लेकिन एक भी बार उनकी नहीं सुनी गई।
सभी झूठे आश्वासन दिए गए। शुक्रवार को झमाझम बारिश के बीच भी कर्मचारी बैठे रहे और एनआरएचएम व चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों के समर्थन में बसपा नेता नरेंद्र कश्यप भी सेक्टर 22 पहुंचे।