चंडीगढ़। कपड़ों का यह ढेर हर लालसा को दिखाता है। जिसमें से हमारी अपनी काैन सी है हमें नहीं पता। जैसे ये सभी कपड़े हमारे लिए नहीं बने, ठीक वैसे ही हमारी हर अभिलाषा भी हमारी नहीं। मगर फिर भी हम उनके पीछे भागते हैं।
पर ऐसा करने की जरूरत क्या है? इसी सवाल के साथ दर्शकों काे साेचने पर मजबूर कर दिया इच्छा नाम की नृत्य प्रस्तुति ने, जिसका आयोजन शुक्रवार को चंडीगढ़ सेक्टर-18 टैगोर थिएटर में किया गया। इसे अलंकार थिएटर की ओर से आयोजित किया गया। पूनीत जेवांदाह और अजय परचे ने यह नृत्य प्रस्तुत किया। स्टेज पर कई कपड़े फैले थे, जैसे इच्छाएं हमारे मन में फैलती जाती हैं। जैसे हर कपड़े का आकार हमारे शरीर से अलग होता है, ठीक वैसे ही हर चाहत भी हमारी नहीं हाेती। मगर उन्हें रोका भी कैसे जाए, क्योंकि दुनिया ही एडम एंड ईव की सेब काे खाने की चाहत से शुरू हुई थी।
इस पर पुनीत ने बताया यह इच्छाएं कहां से आती हैं, क्यों आती हैं, उन्हें कैसे समझना है, काैन सी इच्छा के साथ आगे बढ़ना है किसको पीछे छाेड़ना है यह इस डांस एक्ट से दिखाने की कोशिश की। अगर हर कामना को आगे लेकर चलते रहे तो फिर हम इनमें ही उलझ जाते हैं। किसी के पास काेई बैग है ताे उसे देखकर हमारा भी खरीदने का मन करेगा ताे वह हमारी इच्छा नहीं। वह देखा-देखी वाली बात है। मकसद है अपने मन को समझना। अपनी रूह की आवाज को समझने की जरूरत है। काैन सी अपनी चाह है यह जानना हाेगा। भरतनाट्यम, जैज, बैले, छाऊ, मार्शल आर्ट्स का भी प्रदर्शन किया।