चंडीगढ़। मार्च माह के अंत में अभिभावकों ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए बच्चों की किताबें लेना शुरू कर दिया था। जब आधे से अधिक अभिभावक महंगी किताबें खरीद कर लुट चुके हैं, अब जाकर प्रशासन को परिजनों की परेशानियों का अहसास हुआ है। शिक्षा विभाग ने शनिवार को महंगी किताबों को लेकर आई शिकायत को लेकर दो सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसके सदस्य दो उप निदेशक हैं। सेक्टर-22 की एक दुकान पर शिशु निकेतन स्कूल की किताबें खरीदने आए अभिभावक बोले कि उन्हें प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं है। बच्चों को पढ़ाने के खातिर वह मजबूर हैं, पर प्रशासन किस मजबूरी के हवाले से स्कूल और पुस्तक विक्रेताओं पर मेहरबान हो रहा है, समझ से परे है। कक्षा सात का उनका पुस्तकों का सेट 7793 रुपये का आया। पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा के मुकाबले चंडीगढ़ प्रशासन निजी स्कूल, प्रकाशक और पुस्तक विक्रेताओं पर शिकंजा कसने में नाकामयाब रहा है। पंजाब सरकार द्वारा अभिभावकों की परेशानियां सुनने के लिए हेल्पलाइन ईमेल जारी की गई थी वहीं हरियाणा सरकार द्वारा अभिभावकों की शिकायत पर निजी स्कूलों पर कार्रवाई करने के के निर्देश जारी किए गए है। चंडीगढ़ प्रशासन ने अब जाकर एक समिति बनाई है जो मामले की जांच पड़ताल कर रिपोर्ट तैयार करेगी। आखिरी अभिभावक के लुटने तक समिति की रिपोर्ट आ सकती है।