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चंडीगढ़: दो साल बाद प्रतिबंध हटा, अब दिवाली और गुरु पर्व पर दो घंटे जला सकेंगे पटाखे, ये शर्त भी रखी

Sat, 01 Oct 2022 01:55 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

प्रशासन ने शर्त लगाई है कि सिर्फ ग्रीन पटाखे ही जला सकेंगे, सामान्य की बिक्री भी नहीं होगी। प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों का हवाला दिया गया है।
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दिवाली के पटाखे - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने पटाखों पर लगाए प्रतिबंध को शुक्रवार को हटा लिया है। दो साल बाद लोग रावण दहन, दिवाली पर रात 8 से 10 बजे और गुरु पर्व पर सुबह 4 से 5 व रात 9 से 10 बजे के बीच ग्रीन पटाखे जला सकेंगे। प्रशासन ने हिदायत दी है कि लोग सामान्य पटाखे नहीं जलाएंगे, सिर्फ ग्रीन पटाखे जलाने की ही अनुमति होगी। शहर में बिक्री भी सिर्फ ग्रीन पटाखों की ही होगी।

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पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने शुक्रवार को अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया है। जारी आदेश में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों का हवाला दिया गया है। कहा गया है कि चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से एयर क्वालिटी इंडेक्स की रिपोर्ट को देखने के बाद ही ग्रीन पटाखों को अनुमति दी गई है।

बताया गया कि वर्ष 2020 और 2021 में दिवाली के मौके पर शहर की एयर क्वालिटी संतोषजनक रही थी। यह देखने के बाद ही दशहरा के दिन रावण दहन के समय, दिवाली पर रात 8 से 10 बजे तक और गुरु पर्व के मौके पर सुबह 4 से 5 बजे और फिर रात में 9 से 10 बजे के बीच ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति देने का फैसला लिया गया है। प्रशासन के इस फैसले का चंडीगढ़ क्रैकर्स डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दविंदर गुप्ता ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है एसोसिएशन ने ग्रीन पटाखों को मंजूरी देने की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने मान लिया है।
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दिखने में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखे राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की खोज हैं और ये आवाज से लेकर दिखने तक में पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं। इनको जलाने पर प्रदूषण काफी कम होता है। ये सामान्य पटाखों की तुलना में 40 से 50 फीसदी तक कम हानिकारक गैस पैदा करते हैं, क्योंकि इनमें एल्युमीनियम, बेरियम, पोटैशियम नाइट्रेट और कार्बन का प्रयोग नहीं किया जाता है। ग्रीन पटाखों में खतरनाक रसायनों की मात्रा भी काफी कम होती है।

सामान्य पटाखों की तुलना में महंगे होते हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखों के कीमत की बात करें तो यह परंपरागत पटाखों की तुलना में थोड़े महंगे होते हैं। डीसी ऑफिस की तरफ से इन पटाखों को बेचने के लिए विक्रेताओं को लाइसेंस दिए जाएंगे। इसके लिए ड्रॉ का आयोजन होगा। शहर के अलग-अलग इलाकों में पटाखों की बिक्री के लिए साइट तय किए जाएंगे, जहां से लोग ग्रीन पटाखे खरीद सकेंगे।

सामान्य पटाखों पर नकेल कसना प्रशासन के लिए चुनौती
चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला से घिरा हुआ है। वहां सभी तरह के पटाखे बिकते हैं और जलाए जाते हैं। ऐसे में चंडीगढ़ में उन पटाखों को जलाने से रोक पाना प्रशासन के बड़ी चुनौती है। इसके अलावा कौन से पटाखे ग्रीन हैं और कौन से नहीं, ये पता लगा पाना भी बड़ी चुनौती होगी। प्रशासन ने अब तक ये भी स्पष्ट नहीं किया है कि जो व्यक्ति सामान्य पटाखे जलाते हुए पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। 
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पटाखा प्रतिबंध पर प्रशासन का फैसला हर साल अलग-अलग
बीते पांच साल में दिवाली पर प्रशासन का फैसला अलग-अलग रहा है। वर्ष 2017 में प्रशासन ने तीन दिन के लिए पटाखों की बिक्री और जलाने पर प्रतिबंध हटाया था। इसमें दशहरा, दिवाली और गुरु पर्व पर शाम से 6.30 से 9.30 बजे तक पटाखे जलाने की अनुमति दी गई थी। वर्ष 2018 और 2019 में प्रशासन ने रात 8 से 10 बजे तक पटाखे जलाने की अनुमति दी थी, जबकि वर्ष 2020 और 2021 में पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।

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