दुलत ने कहा कि एनडीए-वन (वाजपेयी सरकार) और एनडीए-टू (मोदी सरकार) की कार्यप्रणाली में बहुत फर्क है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कश्मीर में शांति बहाली की दिशा में किए गए प्रयास उल्लेखनीय हैं। वह हर वर्ग से बात करते थे। मगर आज कश्मीर के हालात वाकई खराब हैं। किसी प्रदेश में गवर्नर रूल अल्प समय के लिए ही रहे तो ही बेहतर है। लंबे समय के लिए गवर्नर रूल प्रदेश के लोकतांत्रिक माहौल के खिलाफ हो सकता है। घाटी में फौज अच्छा काम कर रही है, लेकिन इन्सर्जन्सी जैसे माहौल को सिर्फ और सिर्फ फोर्स से काबू नहीं किया जा सकता।
पूर्व रॉ चीफ का मानना है कि आज माहौल ऐसा है कि पंजाब को भी संभालना होगा। कश्मीर और पंजाब के मसलों में फर्क है, लेकिन दाएं-बाएं (पाकिस्तान-कश्मीर) से पंजाब का माहौल बिगड़ सकता है। पंजाब में रेफरेंडम की आवाज, लॉ एंड आर्डर की कमी का नतीजा है। अगर सरकार मानती है कि आईएसआई भारत में सक्रिय है, तो अपने ही लोगों के बूते पर सक्रिय है। सरकार भारत में आईएसआई से जुड़े अपने लोगों को क्यों नहीं पकड़ती, क्यों आईएसआई के नेटवर्क भारत में पनपने दिया जा रहा है?
एनएसए के मोस्ट पावरफुल पर भी सवाल
आरएस दुलत ने देश में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर के ‘मोस्ट पावरफुल’ होने पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि एनएसए पहले भी होते थे, लेकिन आज ज्यादा शक्तिशाली हैं। प्रधानमंत्री के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। हो सकता है कि यदि मोदी सरकार दोबारा रिपीट हुई तो वर्तमान एनएसए अगले गृहमंत्री बन जाएं।