पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन में आजकल कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पहले तो पीएम मोदी के लुधियाना दौरे के दौरान पीएम द्वारा सीएम प्रकाश सिंह बादल की अपील को नजरंदाज करना और फिर अब पंजाब सरकार की विकास बुक में भाजपा का जिक्र तक न होना।
बता दें कि पंजाब में विधानसभा चुनाव आने वाले है और सूबे में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन में अभी से दरार के संकेत मिलने लगे हैं। इसकी बड़ी वजह है कि पंजाब सरकार ने 'सूबे में विकास के नौ साल' को लेकर एक बुकलेट जारी किया है लेकिन इसमें न तो भाजपा और न ही पार्टी के एक भी नेता का जिक्र है।
इस बुकलेट के जरिये बताया गया है कि सीएम प्रकाश सिंह बादल और डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ही राज्य में विकास का चेहरा हैं। बुकलेट में अंदर के एक पन्ने में पीएम नरेंद्र मोदी की तीन छोटी-छोटी तस्वीरें हैं। पंजाब सरकार की ओर से जारी इस बुकलेट में सूबे में किए गए विकास कार्यों का बखान किया गया है।
बड़ा सवाल: क्या टूट सकता है अकाली-भाजपा गठबंधन?
पंजाब के लुधियाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : File Photo
अकाली-भाजपा गठबंधन बहुत पुराना गठबंधन है। लेकिन भाजपा ने धीरे-धीरे अपने क्षेत्रीय सहयोगियों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड में हुए विधानसभा चुनावों में भी ऐसा देखने को मिला। जहां तक पंजाब का सवाल है तो यहां सत्ता कांग्रेस और अकाली दल-बीजेपी गठजोड़ के बीच बारी-बारी से आती रही। लेकिन 2012 में यह ट्रेंड टूटा और अकाली दल-बीजेपी गठबंधन सत्ता में दोबारा वापसी में कामयाब रहा।
लेकिन हाल के दिनों में राज्य में बीजेपी की लोकप्रियता में गिरावट देखने को मिली है। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 7 सीटों का नुकसान हुआ और 117 सदस्यों वाली विधानसभा में पार्टी 12 सीटों पर सिमट गई। पिछले चुनाव की तुलना में वोट शेयर भी 8 फीसदी कम रहा। यहां तक कि 2014 के आम चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 1.7 गिरा और पार्टी 13 सीटों में महज दो सीटें ही जीत सकी।
अकाली-भाजपा गठबंधन टूटने के मायने
पंजाब के लुधियाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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पंजाब में सत्ता विरोधी लहर है, ऐसे में इसका फायदा कांग्रेस को मिलता है या आम आदमी पार्टी को, यह आगे सामने आएगा। लेकिन बीजेपी अगर गठबंधन तोड़ लेती है तो इसे कुछ फायदा भी हो सकता है।
पिछले दो-चार वर्षों के दौरान पंजाब सरकार की काफी बदनामी हुई है। चाहे नशा का मुद्दा हो या किसानों की आत्महत्या का, राज्य सरकार की साख गिरी है। सतलज-यमुना लिंक कनाल के मसले पर भी पंजाब सरकार की काफी फजीहत हुई है। अगर चुनाव से पहले बीजेपी सरकार से अलग हो जाती है तो कम से कम वो पीएम मोदी के चेहरे के साथ जनता के बीच जा सकती है और उनके विकास कार्यों के सहारे डैमेज कंट्रोल कर सकती है।