चंडीगढ़। भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ लेने वाले जस्टिस सूर्यकांत की अदालत से कभी कोई गरीब खाली हाथ नहीं लौटा। यह कहना है नाै साल तक कैट के प्रेसिडेंट रहे वकील रोहित सेठी का। रोहित सेठी बताते हैं कि जस्टिस सूर्यकांत संविधान की मर्यादाओं में रहते हुए हर जरूरतमंद की मदद करते थे।
सेठी कहते हैं उनकी सोच हमेशा साफ रही। उन्होंने हमेशा रिकॉर्ड तोड़ बुलंदियां हासिल की हैं। उनकी सोच हमेशा महिलाओं को फ्रंटफुट पर रखने की रही है। बार-एसोसिएशन से लेकर ज्यूडिशियरी तक उन्होंने हमेशा महिलाओं को पुरुषों के बराबर अवसर दिलाने की कोशिश की। आज महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से सिस्टम में भ्रष्टाचार भी काफी हद तक थमा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में आम लोगों को तत्काल मदद दिलाने के लिए 24×7 ऑनलाइन लीगल असिस्टेंस पोर्टल शुरू किया। यही नहीं, जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी ) को बरकरार रखने का महत्वपूर्ण फैसला भी सुनाया था। बिहार चुनावों के दौरान भी उनकी बेंच ने अहम निर्णय दिए।
हाईकोर्ट के वकील विकास चतरथ कहते हैं कि एक वकील बनने के बाद सूर्यकांत हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने। इसके बाद हाईकोर्ट जज, उसके बाद चीफ जस्टिस और अब सुप्रीम कोर्ट के सबसे युवा चीफ जस्टिस बनकर उन्होंने नया इतिहास रचा। सूर्यकांत ने कई सोशल वेलफेयर और एनजीओस के लिए कई काम किए। जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए कई अहम और ऐतिहासिक फैसले दिए। चाहे अनुच्छेद 370 का मामला हो, राजद्रोह कानून की समीक्षा हो या फिर पेगासस जांच। हर जगह उनकी निर्णायक भूमिका रही।
अनु चतरथ बोलीं- जस्टिस सूर्यकांत का बेहद सरल और विनम्र स्वभाव
शपथ समारोह में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की वरिष्ठ वकील अनु चतरथ भी शामिल हुईं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में नेपाल, भूटान, मलयेशिया सहित 11 देशों के चीफ जस्टिस मौजूद थे। हाईकोर्ट के पांच वरिष्ठ जज भी राष्ट्रपति भवन पहुंचे।
अनु चतरथ ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत बेहद सरल और विनम्र स्वभाव के हैं। उन्होंने खुद सभी मेहमानों का परिचय करवाया। अनु चतरथ ने यह भी बताया कि सूर्यकांत के पिता शिक्षक थे और उनके परिवार का उनके पिता के परिवार से पुराना करीबी रिश्ता रहा है। पत्नी ने भी उनके कॅरिअर में पूरा साथ निभाया।