-हरियाणा सरकार चलाएगी अभियान, राज्य में हैं 18,85,915 लाभार्थी
-करीब पांच लाख किसानों को नहीं मिली थी 15वीं किस्त
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के करीब पांच लाख किसान पीएम किसान निधि की 15वीं किस्त से वंचित रह गए थे। दरअसल, इन किसानों का ई-केवाईसी, भूमि रिकॉर्ड और आधार का सत्यापन नहीं हो सका था। हरियाणा कृषि विभाग ने इन सभी किसानों का सत्यापन करने का निर्णय लिया है। अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यमुनानगर में हर किसान का सत्यापन कराया जा रहा है। इस सत्यापन में कृषि विभाग और राजस्व विभाग की टीम जुटी हुई है। यमुनानगर में कार्य पूरा होने के बाद राज्य के बचे सभी जिलों में हर लाभार्थी का सत्यापन कराया जाएगा। राज्य में कुल 18,85,915 लाभार्थी किसान हैं। इनमें से 13 लाख 75 हजार से ज्यादा किसानों के खाते में पिछले महीने 15वीं किस्त के दो-दो हजार रुपये जारी कर दिए गए थे। किसानों के खाते में एक साल में तीन किस्तें डाली जाती हैं। अब 16वीं किस्त आएगी।
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राजीव मिश्रा ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि हर लाभार्थी के खाते में पैसे पहुंचाए जाएं। जिन लाभार्थियों के खाते में रुपये नहीं आए थे, उनके सत्यापन का कार्य लगातार जारी है। जिन किसानों का सत्यापन पूरा हो गया है, उनका डाटा भी पीएम किसान निधि की वेबसाइट पर अपडेट किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन किसानों को 16वीं किस्त के साथ 15वीं किस्त के रुपये भी दिए जाएंगे। 16वीं किस्त के लिए भी रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है।
इसलिए रह गए थे वंचित
दरअसल केंद्र सरकार ने फर्जीवाड़े से बचने के लिए पीएम किसान निधि योजना का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए ई-केवाईसी और जमीन सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। साथ ही किसानों को अपने आधार को बैंक अकाउंट से लिंक कराना भी जरूरी है। पांच लाख किसानों में कुछ ऐसे ही किसान हैं, जो इन नियमों का पालन नहीं कर पाए। इस वजह से 15वीं किस्त लटक गई। वहीं, कृषि विभाग के सूत्रों ने यह भी बताया है कि इनमें कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो इस योजना का लाभ नहीं लेना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने इस बारे में कृषि विभाग को सूचित भी नहीं किया है। इस वजह से उनके नाम भी लाभार्थियों की सूची में अंकित हैं। वहीं, कुछ किसान बाहर चले गए और कुछ अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं। वह भी लाभार्थियों की सूची में शामिल हैं। कृषि विभाग ने बताया कि जब पूरे प्रदेश में ई-केवाईसी व जमीन सत्यापन का अभियान चलेगा तो ऐसे लोगों के नाम लाभर्थियों की सूची से हट जाएंगे।