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भले कुछ स्वार्थी लोगों ने इसको बेच डाला है, मगर सच्ची कलम अन्याय के आगे नहीं हारी

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चंडीगढ़। दरिया की तरह तरसेंगे ताउम्र प्यार में, इस जन्म भी क्या हमको किनारे न मिलेंगे.. सीतापुर की शालिनी ने जब अपनी रचना पेश की तो सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। मौका था रविवार को उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से ऑनलाइन आयोजित ‘हेमंती ई-कवि सम्मेलन’ का। इसकी अध्यक्षता सीतापुर के सुप्रसिद्ध कवि पद्म कान्त शर्मा ने की। इस दौरान मंच संचालन कवयित्री शालिनी ने किया।
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ई-कवि सम्मेलन का शुरुआत लखनऊ से निशा सिंह ने रचना ‘मैं निशा हूं, निशा में छलूंगी नहीं, बिन किए भोर को मैं ढलूंगी हीं’ से की। इसके बाद सीतापुर से कवि पद्म कांत शर्मा ने ‘पर पीड़ा है पापा जगत में वेदों का बेजोड़ कथन है’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। चंडीगढ़ से कवि सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने ‘किसी भी बात पर दंगा कराना ठीक है क्या, अगर मतभेद हों तो घर जलाना ठीक है क्या’ सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। लखनऊ से कवि मंजुल मयंक मिश्र ने ‘भले कुछ स्वार्थी लोगों ने इसको बेच डाला है, मगर सच्ची कलम अन्याय के आगे नहीं हारी’ सुनाई। चंडीगढ़ से उर्मिला कौशिक ने ‘बहुत निहारी बॉट मगर तुम नहीं आए, तेरी आस में मैंने तो टूटे ख्वाब सजाए’ सुनाई। दिल्ली से कवि पीके आजाद ने ‘आपकी नीयत अगर अच्छी नहीं, जिदंगी होगी बसर अच्छी नहीं.. सुनाई। इसके बाद कानपुर से अंकिता शुक्ला ने अपनी रचना ‘आंखों वाले भी मतलब के लिए बन गए अंधे हैं, बंदूकें हैं और किसी के कंधे हैं’ सुनाई। बाराबंकी से कवि सुनील ने ‘अगर कुदरत नहीं होती तो तुम या हम नहीं होते’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
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