चंडीगढ़। प्रदेश में 36 आरोही मॉडल स्कूलों के स्टाफ को सरकार की ओर से निर्णय लेने के चार साल बाद भी नियमित नहीं किया गया। इसके साथ न ही स्टाफ को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिल पाया है। आरोही मॉडल स्कूल स्टाफ एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल और शिक्षा मंत्री कंवर पाल से मांग की है कि फैसले को जल्द लागू कराया जाए।
2013 में सरकार ने 36 पिछड़े खंडों में हरियाणा बैकवर्ड ब्लॉक एजुकेशनल सोसायटी के अंतर्गत ये स्कूल खोले थे। यह सोसायटी पहले केंद्र सरकार से वित्त पोषित थी, जिसे बाद में प्रदेश सरकार ने अपने अधीन ले लिया। 2020 में सरकार ने इन स्कूलों को शिक्षा विभाग में समायोजित कर दिया था। पिछले पांच सालों में शिक्षा निदेशालय की तरफ से संतोषजनक पांच साल पूरे कर चुके आरोही मॉडल विद्यालय के शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों के केस तीन बार मांगें जा चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक नियमितिकरण की फाइल दफ्तरों के चक्कर ही काट रही है। हाल ही में छह महीने पहले 21 जुलाई को शिक्षा विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक राजेश खुल्लर की अध्यक्षता में आरोही मॉडल स्कूल सोसायटी की गवर्नमेंट बॉडी की मीटिंग हुई थी। इसमें पांच साल पूरे कर चुके शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया गया था। बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि आरोही मॉडल विद्यालयों के स्टाफ को एलटीसी दी जाएगी और खाली पदों को शीघ्र ही एचकेआरएन के माध्यम से भरा जाएगा, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया गया है।
आरोही मॉडल स्कूल स्टाफ एसोसिएशन के प्रधान मनोज कुमार का कहना है कि पिछले पांच सालों में इन स्कूलों के कई बच्चे आईआईटी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने में सफल रहे हैं। स्कूलों के कुल 340 स्टाफ को नियमित होने का इंतजार है। इनमें 220 शैक्षणिक और शेष गैर शैक्षणिक स्टाफ है।