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काव्य संग्रह ‘संधि रेखा पर खड़ी मैं’ में जिंदगी का सार

Sat, 04 Jan 2014 10:09 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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संवाद साहित्य व पत्रकारिता मंच व सुगंधा संस्था ने कवयित्री शशि प्रभा के काव्य संग्रह संधि रेखा पर खड़ी मैं का लोकार्पण किया गया।
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इसका लोकार्पण साहित्यकार डॉ रमेश कुंतल मेघ, डॉ मैथिली प्रसाद भारद्वाज, व डॉ हुकुम चंद राजपाल ने सेक्टर-23 स्थित मुनि जी के मंदिर में किया।

मंच संचालन दलजीत कौर ने किया। चर्चा से पूर्व कवयित्री शशि प्रभा ने अपने काव्य-संग्रह से कुछ चुनिंदा कविताएं पढ़ीं। काव्य संग्रह पर प्रपत्र पढ़ते हुए डा. कैलाश आहलूवालिया ने कहा कि संग्रह की कविताएं जीवन को सकारात्मक सोच प्रदान करती है।

डा. सुभाष रस्तोगी का कथन था कि जिंदगी के उलझे बिंबों को सुलझाने का प्रयत्न करती है।  प्रेम विज का कहना था कि ये कविताएं समाज व जिन्दगी को खुली आंखों से देखती हैं।
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सुशील ‘हसरत’ नेरलवी के मतानुसार शशि प्रभा की कविताओं में शब्दांकुर भावों की तरुणाई की ओर अग्रसर हैं।  इसके अतिरिक्त कवि व कथकार चंद्रमोहन भार्गव ‘स्नेहहिल’ बाल किशन गुप्ता व डा. श्यामा भारद्वाज ने भी अपने-अपने विचर व्यक्ति किए।

अध्यक्ष मंडल में से बोलते हुए डा. हुक्म चन्द राजपाल ने कहा कि ‘‘सन्धि रेखा पर खड़ी ज़्विताओं में गति के साथ दृष्टि भी है।’’

डा. मैथिली प्रसाद भारद्वाज का कहना था कि कि ‘‘सन्धि रेखा पर खड़ी मैं की कविताएं  एक ऐसी मुकाम पर खड्ी है जहां पर वे भूव व भविष्य को वर्तमान के धरातल पर महसूस करती है।
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डा. रमेश कुंतल मेघ’ ने अपने उद्गार व्यक्त ज़्रते हुए कहा कि ‘‘इस संग्रह की कविताएं आत्म मंथन करते हुए परिवर्तन की ओर सके त करती हैं।’’ कार्यक्रम में चंडीगढ़ पंजाब व हरियाणा के अनेक साहित्यकारों ने भाग लिया।
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