करनाल में पूर्व सीएम मनोहर लाल, कुरुक्षेत्र में नवीन जिंदल और भिवानी-महेंद्रगढ़ में धर्मबीर के लिए बढ़ी चुनौती
तीनों विधायक पहले भाजपा के साथ थे, अब खुलकर कांग्रेस के साथ
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा में तीन निर्दलीय विधायकों के भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने से प्रदेश की तीन लोकसभा क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। करनाल, कुरुक्षेत्र और भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्रों में अब ये विधायक खुलकर कांग्रेस प्रत्याशियों का समर्थन करेंगे। ऐसे में करनाल से भाजपा प्रत्याशी व पूर्व सीएम मनोहर लाल, कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल और भिवानी से चौधरी धर्मबीर सिंह के लिए चुनौती बढ़ गई है।
नीलोखेड़ी से निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं और समाज में उनकी अच्छी पैठ है। वह भाजपा के पूर्व विधायक भगवानदास कबीरपंथी को हराकर विधायक बने हैं। दूसरा, उनका हलका चावल उद्योग के नाम से मशहूर है और अधिकतर व्यापारी और राइस मिलर्स यहां पर हैं। ऐसे में निर्दलीय विधायक के कांग्रेस के साथ जाने से यकीनन मनोहर लाल की चुनौती बढ़ गई है।
रोड़ समुदाय से संबंध रखने वाले रणधीर गोलन भी पूंडरी से भाजपा प्रत्याशी एडवोकेट वेदपाल को हराकर विधानसभा पहुंचे हैं। पूंडरी हलका रोड़ बाहुल है और इनके अलावा कुरुक्षेत्र में भी रोड़ समुदाय के मतदाताओं की संख्या अधिक है। कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र में 71 हजार से अधिक मतदाता रोड़ समुदाय से हैं। रोड़ समुदाय को भाजपा का वोटबैंक माना जाता रहा है, लेकिन अब बदले हालात में नवीन जिंदल के लिए रोड़ समुदाय के वोट बैंक को संभालना चुनौती बन गया है, जबकि आप प्रत्याशी डॉ. सुशील गुप्ता को इसका लाभ मिल सकता है।
इसी प्रकार, चरखी दादरी से विधायक सोमबीर सांगवान के समर्थन से भिवानी से भाजपा प्रत्याशी और जाट चेहरा धर्मबीर सिंह की मुश्किलें बढ़नी तय हैं। अभी तक कांग्रेस प्रत्याशी राव दान सिंह के साथ जाट समुदाय का वोट बैंक लाना चुनौती बना हुआ था, लेकिन अब जाट वोट बैंक दो हिस्सों में बंटना तय है। भिवानी लोकसभा क्षेत्र में जाट मतदाताओं की संख्या अधिक है, खासकर सांगवान गोत्र के मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं।
रामकरण काला और ईश्वर सिंह भी जल्द थामेंगे कांग्रेस का दामन
तीन निर्दलीयों के कांग्रेस के साथ आने के बाद अब जजपा के शाहबाद से विधायक रामकरण काला ने साफ कर दिया है कि वह जल्द ही कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने वाले हैं। इससे पहले उनके दोनों बेटे कंवरपाल और सुक्रमपाल कांग्रेेस में शामिल हो चुके हैं। रामकरण काला का कहना है कि समर्थकों और जनता की आवाज सुनने के बाद ही उन्होंने ये फैसला लिया है, क्योंकि लोग कांग्रेस के साथ जाना चाहते हैं। वहीं, गुहला चीका से जजपा विधायक ईश्वर सिंह भी जजपा से बागी हो चुके हैं और कुमारी सैलजा के जरिये वह भी कांग्रेस का दामन थामने की तैयारी में हैं।
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भाजपा ने नयनपाल रावत व दौलताबाद पर बढ़ाई निगरानी
सरकार को समर्थन देने वाले पृथला से विधायक नयनपाल रावत और बादशाहपुर से विधायक राकेश दौलताबाद पर भाजपा ने निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि, कांग्रेस को समर्थन देने वाले तीनों विधायकों ने नयनपाल रावत और दौलताबाद से भी बात की थी और दोनों ही विधायकों ने कांग्रेस के साथ जाने से इन्कार कर दिया था। क्योंकि नयनपाल रावत पहले भाजपा में रहे हैं और इस बार पार्टी से विधानसभा की टिकट चाहते हैं, पार्टी ने उनको आश्वासन भी दिया है। लेकिन राकेश दौलताबाद की राह में कई कांटे हैं। खुद सीएम के पूर्व ओएसडी जवाहर यादव यहां से टिकट के दावेदार हैं। साथ ही पूर्व मंत्री राव नरबीर सिंह और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ भी टिकट की दौड़ में हैं।